शासकीय सेवकों को अपने दायित्‍वों को नहीं भूलना चाहिए- पूर्व कलेक्टर जैन

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प्रशासन गांव की ओर अभियान अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला संपन्‍न   


शिवपुरी, जिले में सुशासन सप्ताह 2025 के तहत प्रशासन गांव की ओर अभियान 19 दिसंबर से 25 दिसंबर 2025 तक चलाया जा रहा है। इस अभियान अंतर्गत मंगलवार को गांधी पार्क स्थित मानस भवन शिवपुरी में सुशासन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।  

कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पर उपस्थित अतिथियों द्वारा राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न पं.अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्‍ज्‍वलन कर किया गया। इस मौके पर कलेक्टर रवीन्‍द्र कुमार चौधरी, सेवानिवृत्त आईएएस आर.के.जैन, वरिष्‍ठ पत्रकार एवं तथागत फाउंडेशन के अध्यक्ष आलोक एम. इंदौरिया, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं साहित्यकार प्रमोद भार्गव, वरिष्ठ पत्रकार संजीव बांझल, जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी विजय राज सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी, आमजन उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का शाॅल श्रीफल देकर सम्मान भी किया गया। 

कलेक्‍टर रवीन्द्र कुमार चौधरी ने संक्षिप्त उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर सेवा प्रदायगी को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए जितना अच्छा काम हम कर सकते है, उतना अच्छा काम हमें करना चाहिए। इसी से ही सुशासन की जो पहल है, वह सार्थक सिद्ध होगी। शासकीय सेवक बेहतर से बेहतर कार्य करके आमजन के जीवन बेहतर बनाने का प्रयास करें। 

सेवानिवृत्त आईएएस आर.के.जैन ने कहा कि हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए कि पंक्ति के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की सहायता हो सके। जो भी व्यक्ति आपके पास मदद के लिए आता है, उसे जरूर सुनो और मनन भी करो। मैदानी कर्मचारी भी यह सोचे की किस प्रकार शासन की योजनाओं का लाभ गरीब व्यक्ति तक पहुंचे। शासकीय सेवक अपनी कमियों को जाने और उन्हें दूर करें। हर व्यक्ति इस बात को ध्‍यान में रखें कि हम जो भी कर रहे है, उसे ईश्वर देख रहा है, इसलिए अच्छे कर्म करें। शासकीय सेवकों को अपने दायित्वों को नहीं भूलना चाहिए।  

वरिष्ठ पत्रकार एवं तथागत फाउंडेशन के अध्यक्ष आलोक एम. इंदौरिया ने कहा कि सुशासन अच्‍छे निर्णय लेने की एक प्रक्रिया है,  ईमानदारी से अपना काम करें। शासकीय सेवक समन्वय स्थापित कर संवेदनशील, उत्तरदायी एवं जनकल्याणकारी प्रशासन की दिशा में कार्य करें, यही सुशासन की सच्ची भावना होगी और इस सुशासन सप्ताह को केवल एक कार्यक्रम न मानकर, जनसेवा के संकल्प के रूप में आत्मसात करें। 

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं साहित्यकार प्रमोद भार्गव ने कहा कि आज हम पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि सुशासन का सबसे मुख्य अंग है ग्रामसभा। ग्राम सभा में इतनी ताकत होती है कि जो भी आदेश ग्राम सभा में पारित होते है उसे शत प्रतिशत मानने की बाध्यता है। हमारे राष्ट्र की अर्थव्यवस्था दो कारणों से बेहद मजबूत है, प्रथम है कृषि एवं दूसरा है दुग्ध क्रांति। हमें इन्‍हें ध्यान में रखना चाहिए और प्रशासन को इस पर ज्‍यादा ध्‍यान देना चाहिए। 

वरिष्ठ पत्रकार संजीव बांझल ने कहा कि सुशासन विषय को ध्‍यान में रखते हुए कहा कि सुशासन का अर्थ है, अच्‍छा शासन और यह तब संभव है जब आमजन की समस्याओं का निराकरण समय पर संभव हो। उन्होंने कहा कि दूरदराज से आने वाले ग्रामीणों की समस्याएं यदि ग्राम स्‍तर पर हल हो जाए तो वह शहर आकर जनसुनवाई में आवेदन देने से बच सकेगा। इस अर्थ है कि शासकीय सेवक अपने पदीय दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें। यदि आप बेहतर कार्य करते है तो सभी आपके कार्य की सराहना करेंगे। मैदानी स्तर पर यदि शासकीय सेवक कार्य करें तो सुशासन की पहल सार्थक है।

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