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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले: भारत की विदेश नीति क्यों चिंतित है? Hasina Sentence Strains India Ties
ढाका से सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा ने बांग्लादेश के साथ भारत के बिगड़ते संबंधों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
ढाका की अंतरिम सरकार ने भारत से 2013 की प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना को सौंपने की मांग की है, जिस पर भारत ने कोई टिप्पणी नहीं की है।
संधि में राजनीतिक रूप से प्रेरित मामलों में प्रत्यर्पण से इनकार करने का प्रावधान है, जो भारत के लिए एक कूटनीतिक विकल्प प्रस्तुत करता है।
भारत, बांग्लादेश का एक प्रमुख व्यापारिक और विकास साझेदार रहा है, जिसने ढाका को अरबों डॉलर के कर्ज उपलब्ध कराए हैं।
हालांकि, हसीना के सत्ता से हटने और अंतरिम सरकार की स्थापना के बाद, दोनों देशों के मजबूत संबंध अब बाधित होते दिख रहे हैं।
बांग्लादेश इस समय गहन राजनीतिक संक्रमण, आर्थिक अनिश्चितता और इस्लामिक ताकतों की एक नई लहर का सामना कर रहा है।
धार्मिक कट्टरता का बढ़ता उभार अब सिर्फ एक हाशिए का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की भावी राजनीति को निर्धारित करने वाली एक केंद्रीय शक्ति बन सकता है।
देश में हाल के घटनाक्रम केवल राजनीतिक और आर्थिक बदलावों का संकेत मात्र नहीं हैं, बल्कि यह कट्टरपंथी प्रवृत्तियों में एक स्पष्ट और चिंताजनक वृद्धि को भी दर्शाते हैं।
इन प्रवृत्तियों का सीधा असर अल्पसंख्यकों पर हमलों के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भारत की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
यह भारत की पड़ोस नीति के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता और धार्मिक ध्रुवीकरण क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव डाल सकता है।
भारत को अपनी विदेश नीति में इन जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना होगा ताकि पड़ोसी देश में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया जा सके, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
इस क्षेत्र की राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
- शेख हसीना को मौत की सजा, भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ा तनाव।
- बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले और बढ़ती धार्मिक कट्टरता पर भारत चिंतित।
- भारत को प्रत्यर्पण संधि और क्षेत्रीय राजनीति में संतुलन साधने की चुनौती।
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Posted on 24 November 2025 | Check सत्यालेख.com for more coverage.
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