शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परिवहन आयुक्त, मध्यप्रदेश द्वारा दिनांक 16 अप्रैल 2025 को जारी आदेशों एवं दिशा-निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। चेक पोस्ट पर ट्रक चालकों से ₹200 से ₹500 तक की जबरन वसूली की जा रही है, जिसकी कोई रसीद नहीं दी जाती। यह पूरी प्रक्रिया अवैधानिक बताई गई है। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि चेकिंग के दौरान शासकीय कर्मचारियों के साथ प्राइवेट व्यक्ति खाकी जैसी वर्दी पहनकर वाहनों को रोकते और वसूली करते पाए जाते हैं। कई बार इन व्यक्तियों के चेहरे ढके रहते हैं, जिससे आम नागरिक और वाहन चालकों के लिए असली और फर्जी कर्मियों में फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है।
शिकायतकर्ता के अनुसार चेकपॉइंट प्रभारी अक्सर ड्यूटी स्थल से अनुपस्थित रहती हैं और उनकी अनुपस्थिति में अनधिकृत व्यक्ति द्वारा वाहनों के दस्तावेजों की जांच कराई जाती है, जो मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 213(2) का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के अनुसार यह अधिकार केवल अधिकृत अधिकारियों को ही प्राप्त है। आरोप है कि अवैध वसूली के कारण NH-27 पर 1 से 2 किलोमीटर तक लंबा जाम लग जाता है, जिससे यातायात बाधित होता है और आपातकालीन सेवाओं, विशेषकर एंबुलेंस, को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही चेक पोस्ट द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण कर झोपड़ी/ढांचा बनाए जाने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अवैध वसूली की वीडियो रिकॉर्डिंग करने वाले पत्रकारों और समाजसेवियों को धमकाया जाता है तथा पूर्व में एक पत्रकार पर कथित रूप से झूठी FIR भी दर्ज कराई गई थी। एक अन्य गंभीर आरोप में कहा गया है कि दिनांक 04 नवंबर 2025 को आरटीओ चेक पोस्ट का प्रवर्तन अमला अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जिला दतिया में वाहन चेकिंग करता पाया गया, जिसकी पुष्टि थाना जिगना, जिला दतिया में दर्ज FIR से होती है।
इसके अतिरिक्त, चेकपॉइंट प्रभारी द्वारा प्रशासनिक अनुमति के बिना बार-बार जिला झांसी (उत्तर प्रदेश) जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह आवागमन NHAI रक्सा टोल प्लाजा के CCTV फुटेज में दर्ज है, जहाँ शासकीय पहचान पत्र दिखाकर निःशुल्क टोल पार किया गया।
शिकायतकर्ता रितुराज यादव ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि प्रशासन में जनता का विश्वास बना रहे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और जांच कब तक शुरू होती है।


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