कड़ोरा लोधी में आयोजित हुआ एफएलएन मेला : डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार ने बच्चों की नवीन प्रस्तुतियों की करी सराहना

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करैरा। शासकीय प्राथमिक विद्यालय कड़ोरा लोधी में आयोजित प्रारंभिक साक्षरता एवं संख्यात्मक समझ मेला एक अत्यंत प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम बनकर उभरा, जिसमें जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होकर पूरे आयोजन का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों द्वारा भाषा और गणित विषयों पर आधारित तैयार की गईं मौलिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को ध्यान से देखा तथा शिक्षकों के निरंतर प्रयासों की भरपूर प्रशंसा करते हुए जोर देकर कहा कि शुरूआती कक्षाओं में मजबूत साक्षरता और ठोस संख्यात्मक समझ ही हर विद्यार्थी के शैक्षिक सफर की सबसे मजबूत आधारशिला बनाती है। इस मेला के जरिए बच्चे खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया में पूरी तरह डूब गए, जो शिक्षा को अधिक जीवंत एवं आकर्षक बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। मेले के दौरान छात्रों ने स्वयं हाथों से निर्मित शैक्षिक मॉडल, रंग-बिरंगे चार्ट, मनोरंजक भाषा-गणित खेल, विभिन्न शिक्षण सहायक सामग्रियां तथा अनेक रचनात्मक प्रदर्शनियां प्रस्तुत कीं, जिन्होंने वहां मौजूद अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य अतिथियों को गहरे प्रभावित किया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल बच्चों की कल्पनाशीलता और सृजन क्षमता को सामने लाया, बल्कि शिक्षा को रोचक एवं व्यावहारिक बनाने के प्रयासों को भी नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम के बाद दफेदार सिंह सिकरवार ने शासकीय माध्यमिक विद्यालय कड़ोरा लोधी में सजाई गई जन शिक्षा केंद्र स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने छात्रों की वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रयोगों की जीवंत प्रस्तुति तथा नवीनतम विचारों की खुलकर तारीफ की और शिक्षकों के मार्गदर्शन को अत्यंत प्रशंसनीय बताया। इस अवसर पर जिला मेला प्रभारी आशीष वर्मा, खंड संसाधन केंद्र समन्वयक विनोद तिवारी, सहायक परियोजना समन्वयक मुकेश पाठक, खंड अकादमिक समन्वयक महेश कुमार लोधी एवं अनिल चौरसिया, जन शिक्षा केंद्र प्रभारी अमोल सिंह यादव, केंद्र अकादमिक समन्वयक ललेंद्र पारस सहित पूरा विद्यालय परिवार, अभिभावकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर बच्चों को लगातार अभ्यास करने, जिज्ञासा बनाए रखने तथा रुचि के साथ सीखने की सलाह दी गई ताकि वे पूर्ण आत्मविश्वास एवं दृढ़ संकल्प के साथ भविष्य की हर चुनौती का सामना कर सकें। इस प्रकार का आयोजन शिक्षा को अधिक प्रभावी, सहभागीपूर्ण एवं रचनात्मक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान साबित हो रहा है।

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