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बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार: दुनिया क्यों चुप? क्या है राजनीति? Bangladesh Hindus Face Religious Persecution
ढाका, सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ उत्पीड़न एक पुरानी समस्या है, जिसके उदय में भारत की भूमिका रही है।
पूर्वी पाकिस्तान कहे जाने वाले बांग्लादेश में अक्सर इस्लामिक कट्टरता राजनीतिक अस्थिरता के समय बढ़ जाती है।
यह भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय है, जो अल्पसंख्यक समूहों के उत्पीड़न पर संयुक्त राष्ट्र की विफलता को दर्शाता है।
हाल के दिनों में, भारत और बांग्लादेश के राजनयिक संबंधों पर भी इसका असर देखा जा सकता है।
वर्ष 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा में वृद्धि हुई है, जिसमें मंदिरों पर हमले, घरों में लूटपाट और हत्याएं शामिल हैं।
इस पर भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपर्याप्त प्रतिक्रिया ने वहां हिंदुओं के लिए संकट गहरा कर दिया है।
इससे भारत में बांग्लादेश विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं।
आने वाले चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस जैसे दलों के नेता इस मुद्दे को उठा सकते हैं।
इस मामले पर राजनीति गरमाई हुई है, क्योंकि नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं।
इन घटनाओं के कारण भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ सकता है, जिससे दोनों देशों के संबंधों में खटास आ सकती है।
- बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में तेज़ी, मंदिर और घर लूटे गए।
- भारत की प्रतिक्रिया पर सवाल, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर भी चिंता।
- राजनीतिक अस्थिरता के कारण कट्टरता में वृद्धि, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर।
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Posted on 31 December 2025 | Keep reading सत्यालेख.com for news updates.
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