नगर परिषद की खुदाई से पता चला की सीवर का पानी हो रहा नलों में सप्लाई

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लगभग 1 वर्ष से नाले का पानी पी रही थी नई कॉलोनी की जनता 


करैरा:- करैरा नगर परिषद में लंबे समय से चली आ रही गंदे पानी की समस्या तब चरम पर पहुंची, जब विवाद इतना गहरा गया कि नगर परिषद को नल जल लाइन की खुदाई करनी पड़ी। खुदाई के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ड्रिंकिंग वाटर पाइपलाइन सीवर लाइन के साथ फूटी हुई अवस्था में थी। इस वजह से सीवर का दूषित पानी सीधे पेयजल पाइप में मिलकर लोगों के घरों तक पहुंच रहा था। लगभग एक वर्ष तक यह स्थिति बनी रही, जिससे आमजनता को नाली के समान गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ा। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार इस प्रदूषित पानी पर पूरी तरह निर्भर थे, जबकि प्रभावशाली लोगों के यहां टैंकर से शुद्ध पानी पहुंचाया जाता रहा। यह घटना नगर परिषद की गंभीर तकनीकी विफलता को उजागर करती है, जहां बुनियादी ढांचे की मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।


शिकायतों की अनदेखी करने पर आमजनता ने सीएमओ गोपाल गुप्ता पर लगाये गंभीर आरोप


नागरिकों ने इस समस्या को लेकर दर्जनों आवेदन और शिकायतें सीएमओ गोपाल गुप्ता के पास पहुंचाईं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। कोई सुनवाई नहीं हुई, न ही कोई त्वरित कार्रवाई की गई। प्रशासन की यह सुस्ती तब और आश्चर्यजनक लगती है, जब इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों की खबरों ने पूरे प्रदेश को हिला दिया। करैरा में भी यही पैटर्न दोहराया गया—लोगों की शिकायतों को अनसुना कर दिया गया और स्थिति को नियंत्रित करने की बजाय अनदेखा किया गया। यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन की प्राथमिकताएं आमजन की स्वास्थ्य सुरक्षा से कहीं दूर थीं। इस लापरवाही ने न केवल लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाला, बल्कि लोकतंत्र में जनता की आवाज के प्रति अधिकारियों की उदासीनता को भी बेनकाब किया।


30 वर्ष पुरानी लाइन और भ्रष्टाचार का जाल


करैरा की जल आपूर्ति व्यवस्था लगभग तीन दशक पुरानी पाइपलाइनों पर टिकी हुई है, जिनका नियमित रखरखाव कभी नहीं हुआ। नगर परिषद द्वारा पाइपलाइन रखरखाव और फिल्टर प्लांट के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में यह धन बंदरबांट का माध्यम बन चुका है। फिल्टर सिस्टम की स्थिति दयनीय है—एलम और ब्लीचिंग के नाम पर भारी अनियमितताएं हो रही हैं। वास्तव में नदी का असंसाधित पानी सीधे सप्लाई कर दिया जाता है, बिना उचित शुद्धिकरण के। केंद्र सरकार की ‘हर घर जल’ योजना के बावजूद शहर के अंदर ही शुद्ध पानी पहुंचाने में नगर परिषद पूरी तरह असफल रही है। यह भ्रष्टाचार का जाल गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है, जबकि अमीर वर्ग वैकल्पिक साधनों से सुरक्षित रहता है।


जनता ने की मांग तत्काल सुधार हो एवं जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई


करैरा के निवासियों में अब गुस्सा चरम पर है। वे पूछ रहे हैं कि आखिर किसके दबाव में सीएमओ ने इस तरह की घोर लापरवाही बरती? भ्रष्टाचार की इस प्रथा को कब तक जारी रखा जाएगा, जबकि देशभर में जल जीवन मिशन के तहत शुद्ध पानी पहुंचाने का दावा किया जा रहा है। जरूरत है तत्काल नई पाइपलाइन बिछाने, फिल्टर प्लांट को पूरी तरह कार्यानुसार बनाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है। जनता अब चुप नहीं रहेगी—वे शुद्ध पानी का अपना संवैधानिक अधिकार मांग रही है, और इस बार उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता।



इनका कहना है ।


(1) हम हफ़्ते में दो बार पानी का टैंकर डलवाते है नल में काला पानी है जब लाइन खुदी तो पता चला की नल नहीं सीधा सीवर का पानी आता है 


पंकज जैन स्थानीय निवासी 


(2) नल कनेक्शन में नाली का पानी नगर परिषद भेज रही थी जब हमने शिकायत करी तो सीएमओ हमसे पूछने आ गए आपने हाउस टैक्स कब से जमा नहीं किया 


महेंद्र गुप्ता स्थानीय निवासी 


(3) जहाँ जहाँ गंदे पानी की शिकायत है उसे दुरुस्त करवा देंगे आप बताओ हम हर जगह सुधरवा देंगे 


गोपाल गुप्ता सीएमओ करैरा

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