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महंगाई का असर: दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 1.33% हुई; वित्त पर असर Retail Inflation Rises In December
सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में खुदरा महंगाई दर पिछले महीने की तुलना में बढ़कर 1.33% पर पहुँच गई है, जो तीन महीनों में सबसे अधिक है।
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से दाल, सब्जियों, मांस-मछली, अंडे और बिजली की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है।
नवंबर में यह दर 0.71% थी, जो पिछले 14 सालों में सबसे कम थी, जबकि अक्टूबर में यह 0.25% थी।
सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने महंगाई को बढ़ाया है।
खुदरा महंगाई अक्टूबर में 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थी, जिसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी थी।
यह वर्तमान CPI श्रृंखला में अब तक की सबसे कम महंगाई थी, जो लगभग 14 साल का निचला स्तर था।
इससे पहले सितंबर में यह 1.44% पर थी।
इस बदलाव का सीधा असर आम आदमी के 'वित्त' और 'निवेश' पर पड़ेगा, क्योंकि 'मार्केट' में 'शेयर' की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
'उद्योग' जगत भी इस महंगाई से प्रभावित हो सकता है।
भारत में CPI की मौजूदा श्रृंखला 2012 के आधार वर्ष पर आधारित है।
इसका मतलब है कि 2012 की कीमतों को 100 मानकर तुलना की जाती है।
पहले 2010 या 1993-94 वाली श्रृंखलाएँ थीं, लेकिन समय के साथ अपडेट होती रहती हैं ताकि आंकड़े सही रहें।
हर नई CPI श्रृंखला में आधार वर्ष बदलता है, जिससे 'मार्केट' के रुझानों का सही अंदाजा लगाया जा सके और निवेशकों को सही 'निवेश' के अवसर मिल सकें।
- खुदरा महंगाई दर दिसंबर में बढ़कर 1.33% हुई, तीन महीने में सबसे ज्यादा।
- दाल, सब्जियों और बिजली की कीमतों में वृद्धि से बढ़ी महंगाई।
- अक्टूबर में खुदरा महंगाई 0.25% थी, जो 14 साल में सबसे कम थी।
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Posted on 13 January 2026 | Keep reading सत्यालेख.com for news updates.
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