ग्राहकों ने जब चाय पत्ती की पैकिंग, क्यूआर कोड और गुणवत्ता पर शक जताया और जांच की, तो सच्चाई सामने आ गई। असली के नाम पर नकली चाय पत्ती बेची जा रही थी, और जब इसका विरोध हुआ तो स्मार्ट बाजार मॉल में जमकर विवाद हुआ।
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि यह केवल स्मार्ट बाजार मॉल पर नही बल्कि पूरा नेटवर्क हो सकता है, जो लंबे समय से आम जनता की जेब पर डाका डाल रहा है। सवाल उठता है कि
क्या प्रशासन की निगरानी नाकाम है?
खाद्य विभाग अब तक कहां था?
घटना की सूचना मिलते ही बाजार में भीड़ जुट गई और लोग स्मार्ट बाजार मॉल को सील करने और सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। लोगों का कहना है कि अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कल कोई भी ब्रांड नकली बनाकर बेचा जा सकता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को साधारण विवाद मानकर दबाता है या नकली ब्रांड माफिया पर बड़ा एक्शन लेता है।


