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क्या सोशल मीडिया बदल रहा है चुनावों का रुख? बीजेपी और कांग्रेस की रणनीति Election Polls' Rising Inaccuracy
सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव सर्वेक्षण अब पहले की तुलना में अधिक बार गलत साबित हो रहे हैं, जिसका एक मुख्य कारण सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव है।
2024 के लोकसभा चुनावों में एग्जिट पोल की विफलता और हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इनकी सटीकता में कमी दर्शाती है कि ये सर्वेक्षण अभी भी मतदान के पारंपरिक कारकों पर निर्भर हैं, जबकि एआई और सोशल मीडिया संचालित प्रचार अभियानों से उत्पन्न व्यक्तिगत प्रभाव को अनदेखा कर रहे हैं।
ये पारंपरिक कारक अब भी मतदाता की पसंद तय करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी और कांग्रेस जैसी पार्टियां अब सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति बना रही हैं।
सोशल मीडिया पर सक्रियता, गलत सूचनाओं का प्रसार और व्यक्तिगत हमलों के माध्यम से मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।
ऐसे में, मतदाताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली जानकारी की सत्यता की जांच करें और सोच-समझकर अपना वोट दें।
चुनाव में सोशल मीडिया के प्रभाव का आकलन करना अब बेहद जरूरी हो गया है।
नेताओं और राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति में बदलाव करने की आवश्यकता है, ताकि वे मतदाताओं को सही जानकारी प्रदान कर सकें और लोकतंत्र को मजबूत बना सकें।
- चुनाव सर्वेक्षणों की सटीकता पर उठे सवाल, सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ा।
- बीजेपी और कांग्रेस की सोशल मीडिया रणनीति पर विशेषज्ञों की राय।
- मतदाताओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी की जांच करने की सलाह।
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Posted on 13 January 2026 | Stay updated with सत्यालेख.com for more news.
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