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कौशिक बसु का लेख: दुनिया क्यों मान रही प्रवासियों को खतरा? राजनीति में गर्माहट Immigrants Refugees Seen As Threat
सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, प्रख्यात अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने अपने नवीनतम कॉलम में इस बात पर प्रकाश डाला है कि क्यों दुनिया भर में प्रवासियों और शरणार्थियों को खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
नए साल में भी दुनिया की तस्वीर निराशाजनक दिख रही है, जहां बढ़ते संघर्ष और सत्तावाद संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं।
आर्थिक असमानता असुरक्षा को बढ़ा रही है, लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि 'दूसरों' के प्रति नफरत बढ़ रही है।
विभिन्न देशों के नेता प्रवासियों और शरणार्थियों को एक खतरे के रूप में चित्रित कर रहे हैं।
बसु ने इस संदर्भ में डब्ल्यूएच ऑडेन की कविता 'रिफ्यूजी ब्लूज' का उल्लेख किया, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध की पूर्वसंध्या पर एक वक्ता चेतावनी देता है कि प्रवासियों को प्रवेश देने से स्थानीय लोगों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
यह 'जेनोफोबिया' अचानक नहीं उभरा है, बल्कि गहरे संरचनात्मक बदलावों का परिणाम है।
हम भूल जाते हैं कि राष्ट्र-राज्य एक अपेक्षाकृत नया विचार है, जो उस समय विकसित हुआ जब यात्रा धीमी और सीमित थी।
उस समय, दुनिया को अलग-अलग समुदायों के समूह के रूप में देखना तार्किक था, जहां प्रत्येक समुदाय अपने सदस्यों की भलाई के लिए जिम्मेदार था।
इन इकाइयों को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए एक साझा पहचान आवश्यक थी।
इस बढ़ती हुई प्रवृत्ति का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वैश्विक **राजनीति** तेजी से बदल रही है और **चुनाव** नजदीक हैं, क्योंकि विभिन्न **नेता** इस मुद्दे को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
**कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी पार्टियाँ इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपना सकती हैं।
- कौशिक बसु ने प्रवासियों के प्रति बढ़ती नफरत पर चिंता व्यक्त की।
- राजनेता प्रवासियों को खतरे के रूप में पेश कर रहे हैं: कौशिक बसु।
- आर्थिक असुरक्षा और संरचनात्मक बदलाव जेनोफोबिया को बढ़ावा दे रहे हैं।
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Posted on 13 January 2026 | Check सत्यालेख.com for more coverage.
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