आध्यात्मिक सत्संग: धर्म और राजनीति में मन की शुद्धि का महत्व Importance Of Pure Satsang Gathering

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आध्यात्मिक सत्संग: धर्म और राजनीति में मन की शुद्धि का महत्व Importance Of Pure Satsang Gathering

सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, पं. विजयशंकर मेहता ने सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्संग में भाग लेने से पहले तन और मन दोनों को शुद्ध करना आवश्यक है।

उन्होंने गरुड़ जी और काकभुशुंडि जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि सत्संग में जाने से पूर्व स्नान करना, कुछ खाना-पीना और प्रसन्नचित्त रहना चाहिए।

दुनियादारी की चिंताओं को बाहर छोड़कर आना चाहिए।

मेहता जी ने 'मंत्र-स्नान' की बात करते हुए कहा कि जिस प्रकार शरीर को जल से स्नान कराया जाता है, उसी प्रकार मन को प्राणवायु से स्नान कराना चाहिए।

इसके लिए किसी मंत्र का जाप करते हुए उसे सांस में उतारकर शरीर में प्रवाहित करना चाहिए, जिससे मन शुद्ध हो सके।

उन्होंने आगे कहा कि जब हम तन और मन दोनों को शुद्ध करके सत्संग में बैठते हैं, तो हमें जो ज्ञान प्राप्त होता है, वह अद्वितीय और अत्यंत उपयोगी होता है।

यह आध्यात्मिक शुद्धि हमें राजनीति और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने में मदद करती है।

सत्संग एक ऐसा माध्यम है, जिससे व्यक्ति अपने अंतर्मन को शांत और स्थिर रखकर जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय ले सकता है, जो कि आज की राजनीति में बहुत आवश्यक है।

  • सत्संग से पहले तन और मन को शुद्ध करें।
  • मंत्र-स्नान से मन की शुद्धि संभव है।
  • आध्यात्मिक शुद्धि राजनीति में सहायक।

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Posted on 06 January 2026 | Check सत्यालेख.com for more coverage.

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