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महाभारत रहस्य: कुंती की दर्दनाक मृत्यु का आध्यात्मिक सत्य उजागर, धर्म कथा Kunti, Mother Of Pandavas
सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, महाभारत की कथा में माता कुंती का व्यक्तित्व धैर्य और संघर्ष से भरा रहा।
वह पांडवों की मां होने के साथ-साथ सहनशक्ति और धर्म की प्रतिमूर्ति थीं।
बहुत कम लोग जानते हैं कि कुंती का जन्म साधारण नहीं था, बल्कि वह एक दिव्य शक्ति का अंश थीं।
कुंती का पूरा जीवन त्याग और तपस्या का उदाहरण रहा।
उन्होंने कुरुवंश की नींव को संभाले रखा।
माता कुंती के जन्म की दिव्यता से लेकर उनके जीवन के अंतिम समय तक की यात्रा हमें सिखाती है कि संसार में किस तरह मोह का त्याग करके मोक्ष प्राप्त किया जाता है।
महाभारत के अनुसार, मां कुंती को 'सिद्धि' का अवतार माना जाता है, जिन्हें सफलता और निपुणता की देवी कहा जाता है।
कुछ धार्मिक ग्रंथों में कुंती को 'मति' यानी बुद्धि का अवतार भी बताया गया है।
माता कुंती की मृत्यु एक वन में हुई, जहां वे धृतराष्ट्र और गांधारी के साथ वानप्रस्थ आश्रम में रह रही थीं।
एक दिन, वे तीनों जंगल में गहरी तपस्या में लीन थे, तभी अचानक जंगल में आग लग गई जिसमें वे फंस गए और उनकी मृत्यु हो गई।
माता कुंती का जीवन त्याग, तपस्या और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि कैसे सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर आध्यात्मिक उन्नति की जा सकती है।
कुंती का चरित्र भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति और धार्मिक निष्ठा का प्रतीक है, जिसकी कहानियाँ आज भी मंदिरों और घरों में सुनाई जाती हैं।
- माता कुंती 'सिद्धि' का अवतार मानी जाती हैं, जो सफलता की देवी हैं।
- कुंती की मृत्यु वानप्रस्थ आश्रम में जंगल की आग में फंसने से हुई।
- कुंती का जीवन त्याग, तपस्या और धर्म का प्रेरणादायक उदाहरण है।
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Posted on 08 January 2026 | Visit सत्यालेख.com for more stories.
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