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थोक महंगाई में उछाल: क्या निवेश पर होगा असर? वित्त मंत्रालय चिंतित Wholesale Price Inflation Increase Reported
सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर बढ़कर 0.83% हो गई है, जो पिछले आठ महीनों में सबसे अधिक है।
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने इस उछाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
नवंबर में यह दर माइनस 0.32% थी, जबकि अक्टूबर में माइनस 1.21% दर्ज की गई थी।
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि दैनिक उपयोग की वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि हुई है।
थोक महंगाई के तीन मुख्य घटक हैं: प्राथमिक वस्तुएं (22.62% वेटेज), ईंधन और बिजली (13.15% वेटेज), और विनिर्मित उत्पाद (64.23% वेटेज)।
दिसंबर में खुदरा महंगाई दर भी बढ़कर 1.33% हो गई, जो पिछले तीन महीनों में सबसे अधिक है।
नवंबर में यह दर 0.71% थी, जबकि अक्टूबर में यह 0.25% थी, जो 14 वर्षों में सबसे कम थी।
थोक महंगाई का लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहना उत्पादक क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
यदि थोक मूल्य लंबे समय तक ऊंचे रहते हैं, तो उत्पादकों को अपनी उत्पादन लागत बढ़ानी पड़ती है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
यह स्थिति शेयर बाजार और निवेश के माहौल को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे वित्त मंत्रालय की चिंता बढ़ गई है।
उद्योग जगत इस पर बारीकी से नजर रख रहा है।
- दिसंबर में थोक महंगाई 0.83% पर पहुंची, 8 महीने का उच्चतम स्तर।
- खाने-पीने की चीजों की महंगाई ने थोक महंगाई को बढ़ाया।
- खुदरा महंगाई भी बढ़कर 1.33% हुई, निवेश पर असर की आशंका।
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Posted on 15 January 2026 | Keep reading सत्यालेख.com for news updates.
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