नालियाँ खुली छोड़ने पर फूटा आक्रोश, कल्लू महाराज की चेतावनी—निराकरण नहीं तो अनशन
दिनारा नगर के अशोक होटल के पास पिछोर तिराहे स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों द्वारा नालियाँ अधूरी व खुली छोड़ने के कारण एक छोटी गौ बछिया पुलिया में भरे पानी में गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही गौ सेवक कल्लू महाराज तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद बछिया को बाहर निकालकर उसका उपचार कराया। गनीमत रही कि समय रहते सहायता मिलने से बछिया की जान बच गई और अब वह पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है।
इस घटना ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उक्त स्थान पर न तो नाली ढकी हुई है और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था की गई है। यही नहीं, दिनारा नगर में कई स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नालियाँ खुली पड़ी हैं, जिन पर पटिया तक नहीं रखी गई। यह स्थिति न केवल गोवंश बल्कि आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।
गौ सेवक कल्लू महाराज ने घटना के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकारियों से तत्काल नालियों का निर्माण व ढकाव कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “आज एक छोटी गौ बछिया गिरी है, कल किसी का मासूम बच्चा भी गिर सकता है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ और किसी भी प्रकार की जनहानि या गोवंश की मृत्यु होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकारियों की होगी।”
कल्लू महाराज ने इसे घोर लापरवाही करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द समस्या का स्थायी निराकरण नहीं किया गया, तो गौ सेवक, समाजसेवी एवं जनप्रतिनिधि सामूहिक रूप से अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि गोवंश और आम जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों में भी इस घटना को लेकर भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण आंख मूंदे बैठा है। खुली नालियाँ और अधूरे निर्माण कार्य किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर स्थिति का जायजा तक नहीं ले रहे हैं।यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि यदि समय रहते ताबड़तोड़ कार्रवाई नहीं की गई, तो जन आक्रोश और तेज होगा। अब देखना यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही जागता है


