ब्लास्टिंग से बर्बाद हो रहे किसानों के खेत, उड़ते पत्थरों और धूल से फसलें चौपट; पारागढ़ के ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

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करैरा :-  करैरा अनुविभाग के ग्राम पारागढ़ में संचालित एक पत्थर क्रशर की लगातार हो रही ब्लास्टिंग से आसपास के किसानों की खेती गंभीर संकट में आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजाना किए जाने वाले विस्फोटों के कारण बड़े-बड़े पत्थर खेतों तक आकर गिर रहे हैं, जबकि धूल का गुबार पूरी कृषि भूमि पर फैलने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है, लेकिन क्रशर संचालन से उत्पन्न परिस्थितियों ने उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में बिखरे पत्थरों से जुताई, बुवाई और सिंचाई जैसे कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर मिट्टी की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त होने से भूमि की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। किसानों कामता प्रसाद लोधी, राय सिंह लोधी, प्रकाश लोधी, रामनिवास लोधी, कीरत सिंह लोधी एवं बलदेव सिंह लोधी ने बताया कि हर विस्फोट के बाद उड़कर आने वाले पत्थर उनकी खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। उनका कहना है कि खेतों में बने कच्चे कुएं भी तेज कंपन के कारण कमजोर होकर ध्वस्त होने लगे हैं, जिससे सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है और भविष्य की खेती पर भी संकट मंडरा रहा है। किसानों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें प्रस्तुत की गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। आरोप है कि जब क्रशर संचालकों पूजा पत्नी पवन खटीक, श्याम सुंदर शर्मा निवासी शिवपुरी तथा उनके पार्टनर संदीप महेश्वरी निवासी नरवर से इस विषय में आपत्ति दर्ज कराई जाती है तो वे स्वयं को राजनीतिक प्रभाव वाला बताते हुए कार्रवाई न होने की बात कहते हैं, जिससे प्रभावित परिवारों में भय का वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात होने वाली ब्लास्टिंग से तेज आवाज, कंपन और उड़ती धूल के कारण सामान्य जीवन भी प्रभावित हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया गया तो खेती योग्य भूमि को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, खेतों के बीच हो रही ब्लास्टिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने अथवा क्रशर को आबादी और कृषि क्षेत्र से दूर स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन किसानों की फसल, भूमि और सिंचाई संसाधनों को नुकसान पहुंचा है, उनका सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाया जाए, ताकि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके।

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