घटना शुक्रवार शाम की है, जब बुरानपुर गांव की रहने वाली खुशबू लोधी को पहली डिलीवरी के दौरान अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवारजन उन्हें लेकर फौरन खोड़ स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मरीज को तुरंत एंबुलेंस क्रमांक CG04NW2506 में शिफ्ट किया गया और परिजन भी साथ सवार हो गए। लेकिन अस्पताल पहुंचने का यह सफर खुशबू और उनके परिवार के लिए किसी डरावने सपने जैसा साबित हुआ।
प्रसूता के जेठ संजीव लोधी ने आज शनिवार की सुबह 11 बजे बताया कि ज्यों ही एंबुलेंस आगे बढ़ी, उसमें तकनीकी खराबी आनी शुरू हो गई। रास्ते में वाहन एक बार पहले भी बंद हुआ था, जिसे किसी तरह दोबारा चालू किया गया। लेकिन सुरवाया थाना क्षेत्र के अंतर्गत एनएच-27 पर पहुंचते ही एंबुलेंस ने पूरी तरह दम तोड़ दिया। वाहन के रुकते ही चालक ने इंजन गर्म होने और तेल कम होने का हवाला देकर आगे बढ़ने से साफ इनकार कर दिया। हद तो तब हो गई जब उसने मदद करने के बजाय प्रसव पीड़ा से कराह रही उस नई नवेली प्रसूता और उसके परिजनों को रात के वक्त अंधेरे में हाईवे पर ही नीचे उतार दिया।
उस सूने रास्ते पर रात के सन्नाटे में दर्द से छटपटाती महिला को सड़क किनारे छोड़ दिए जाने से परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। चारों तरफ कोई मदद नजर नहीं आ रही थी और परिजन इस बात से खौफजदा थे कि यदि इस बीच महिला की हालत और बिगड़ी तो क्या होगा। वे सड़क से गुजरने वाले वाहनों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन डर के मारे किसी ने अपनी गाड़ी नहीं रोकी।
इस बीच, मसीहा बनकर झांसी से शिवपुरी की तरफ आ रहे एक कार चालक विशाल वहां से गुजरे। उन्होंने जब हाईवे पर एक प्रसूता को इस लाचारी की हालत में खड़े देखा, तो उनका दिल पसीज गया। विशाल ने बिना एक पल गंवाए अपनी कार रोकी, तुरंत खुशबू और उनके परिजनों को उसमें बैठाया और तेजी से शिवपुरी जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने महिला को भर्ती किया, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
इस अमानवीय लापरवाही और आपातकालीन सेवा के दावों की कलई खुलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषिश्वर ने कहा है कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और इसकी पूरी विभागीय जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, एक अजनबी की इंसानियत ने तो उस रात खुशबू और उसके परिवार को बचा लिया, लेकिन 108 एंबुलेंस सेवा की इस लापरवाही ने व्यवस्था पर एक गहरा सवालिया निशान जरूर छोड़ दिया है।


