सर्किल जेल शिवपुरी में राष्ट्रीय गीत "वंदे मातरम" के 150 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम आयोजित

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राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका और इसकी स्थाई सांस्कृतिक विरासत के महत्व को दृष्टिगत रखते हुए प्रथम चरण के अंतर्गत आज सर्किल जेल शिवपुरी में जेल अधिकारी/कर्मचारी एवं बंदियों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

इस अवसर पर जेल अधीक्षक आर्य द्वारा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वंदे मातरम बंकिमचन्द्र चटर्जी के उपन्यास "आनंद मठ" में प्रकाशित हुआ जिसे भारतीय संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया राष्ट्रगीत लोगों को एकजुट करने और राष्ट्रीय एकता जगाने में सक्षम है।

आर्य ने अपने उद्बोधन में यह भी बताया कि राष्ट्रगीत मातृभूमि की वंदना और सम्मान का प्रतीक है। इस गीत में भारत माता की स्तुति की गई है और उसकी सुंदरता, शक्ति एवं कृपा का वर्णन किया गया है।

राष्ट्रगीत के महत्व को समझाते हुए जेल अधीक्षक आर्य द्वारा बताया गया कि वंदे मातरम हमारे देश की गरिमा और उसकी महानता का उद्घोष करता है राष्ट्रगीत हमें हमारी मातृभूमि के प्रति गर्व और समर्पण की भावना से भर देता है। जेल अधीक्षक द्वारा "वंदे मातरम" सम्पूर्ण सामूहिक गायन करवाया गया। साथ ही स्वदेशी वस्तुएं अपनाए जाने का सामूहिक संकल्प दिलाया गया तत्पश्चात नई दिल्ली में प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण अवलोकन करवाया गया। इस अवसर पर उप जेल अधीक्षक, जेल चिकित्सक, जेल स्टाफ एवं सभी बंदी उपस्थित रहा।

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