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अप्रैल 2026 से श्रम संहिताएं लागू: औद्योगिक वित्त और निवेश पर क्या होगा असर? Draft Labour Codes Pre-published
सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में घोषणा की है कि चार नए लेबर कोड्स के मसौदा नियम बहुत जल्द प्री-पब्लिश किए जाएंगे, जिसके बाद हितधारकों को पांच दिनों के भीतर सुझाव देने का अवसर मिलेगा और फिर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
ये महत्वपूर्ण श्रम संहिताएं अगले वित्तीय वर्ष, यानी अप्रैल 2026 से देश भर में पूरी तरह से लागू होने की संभावना है, जिसका औद्योगिक क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
इन कोड्स में एक बड़ा बदलाव ग्रेच्युटी पात्रता में है, जो पहले 5 साल की सेवा के बाद मिलती थी, अब वह घटकर सिर्फ 1 साल हो जाएगी, जिससे श्रमिकों को तत्काल वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
केंद्र सरकार ने लंबे समय से चले आ रहे 29 जटिल और भ्रमित करने वाले केंद्रीय श्रम कानूनों को सरल बनाते हुए इन्हें चार प्रमुख कोड्स में समाहित किया है: कोड ऑन वेजेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस, सोशल सिक्योरिटी और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी।
ये कोड्स 2020 में पारित हुए थे, लेकिन उनके नियम बनाने में कुछ देरी हुई।
चूंकि श्रम एक समवर्ती विषय है, इसलिए राज्यों को भी अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इन कोड्स को अधिसूचित करना होगा और अपने नियमों को अपडेट करना होगा।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना है, जिससे उद्योगों के लिए परिचालन आसान हो और नए निवेश को आकर्षित किया जा सके।
इस परिवर्तन से शेयर मार्केट और वित्त क्षेत्र में भी नई हलचल देखने को मिल सकती है, क्योंकि कंपनियों को अपने एचआर और अनुपालन नीतियों में बदलाव करने होंगे, जिसका सीधा असर उनके मार्केट मूल्यांकन पर पड़ सकता है।
सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
इन कोड्स का कार्यान्वयन भारतीय वित्त प्रणाली और श्रम मार्केट को एक नई स्थिरता प्रदान करेगा।
- नए श्रम कोड अप्रैल 2026 तक पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।
- ग्रेच्युटी अब 5 के बजाय 1 साल में मिलेगी, श्रमिकों को बढ़ी सुरक्षा।
- 29 पुराने कानूनों को 4 नए कोड्स में बदला गया, उद्योग के लिए सरलता।
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Posted on 04 December 2025 | Visit सत्यालेख.com for more stories.
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