पट्टे हाथ में, पर जमीन अधर में: बुजुर्ग बूँदा बाई आदिवासी की ढलती उम्र और न खत्म होने वाला संघर्ष

0


 कहते हैं बुढ़ापा सहारे का समय होता है, लेकिन शिवपुरी के आदिवासी अंचल में यह समय सबसे ज्यादा पीड़ा देने वाला बन चुका है। बुजुर्ग बून्दाबाई भी उन्हीं पीड़ित आदिवासियों में से एक हैं, जिनकी उम्र अब ढलती जा रही है, आंखों की रोशनी कम हो रही है, शरीर जवाब देने लगा है, मगर आज तक यह तय नहीं हो सका कि उनकी जमीन आखिर है कहां। शासन ने पट्टा तो दे दिया, लेकिन जमीन आज भी कागजों और दफ्तरों के बीच भटक रही है। बून्दाबाई जब अपनी कांपती उंगलियों से पट्टे के कागज दिखाती हैं, तो उनकी आंखों में एक ही सवाल होता है अगर जमीन हमारी है, तो हमें उस पर खड़ा होने का हक क्यों नहीं... वर्षों से वह कभी पटवारी के पास जाती हैं, कभी तहसील, तो कभी वन विभाग। हर बार एक नई कहानी सुना दी जाती है। कभी कहा जाता है कि जमीन राजस्व की है, तो कभी उसे वन विभाग की परिधि मे बताकर सीमांकन से इनकार कर दिया जाता है।

कृषि एप में जमीन राजस्व विभाग के नाम दर्ज दिखाई देती है, लेकिन मौके पर पहुंचते ही पटवारी टीम कह देती है कि यह वन विभाग की भूमि है। वन विभाग कहता है कि यह उनके अधीन है, इसलिए सीमांकन नहीं होगा। इस आपसी खींचतान में बून्दाबाई जैसी बुजुर्ग महिलाएं सबसे ज्यादा पिस रही हैं। उनके पास न तो लड़ने की ताकत बची है और न ही लंबी कानूनी लड़ाई का साधन।

25 दिसंबर 2025 को ग्राम शिवपुरी के खुटेला  में ग्राम पटवारी  सहित अन्य पटवारियों, राजस्व निरीक्षक, वन विभाग और पुलिस की मौजूदगी में ग्राम खुरैना की भूमि पर मौका-मुआयना हुआ। सर्विस क्रमांक 333, वर्ष 1997 से दर्ज भूमि की पहचान कराई गई। बून्दाबाई भी उम्मीद लेकर वहां पहुंचीं, लेकिन वन विभाग ने यह कहकर सीमांकन से मना कर दिया कि भूमि उनकी परिधि में आती है। एक बार फिर बून्दाबाई की उम्मीद वहीं टूटकर गिर गई।

यह कहानी सिर्फ बून्दाबाई की नहीं है। ऐसे सैकड़ों आदिवासी हैं, जो 10-15 साल से अपनी जमीन पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। किसी की जमीन पर कॉलोनी बस गई, किसी की फाइल धूल खा रही है। सवाल यह है कि क्या बून्दाबाई अपनी जमीन देखे बिना ही इस दुनिया से चली जाएंगी। अगर ऐसा हुआ, तो यह सिर्फ एक बुजुर्ग की हार नहीं होगी, बल्कि पूरी व्यवस्था पर एक गहरा सवाल होगा। राजस्व निरीक्षक प्रमोद शर्मा का कहना है कि सीमांत एप मे जमीन अलग जगह आ रही है मगर पुराने नक्शे में जमीन वन मे आ रही है , जिस कारण सीमांकन मे दिक्कत आई है , इसका निदान जिला कलेक्टर ही कर सकते हैं । वे जमीन का विनिमय कर सकते हैं।

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)
/*-- Don't show description on the item page --*/
NewsLite - Magazine & News Blogger Template
To Top