पीड़ित ने बताया कि ग्राम खौकर स्थित सर्वे क्रमांक 342, कुल रकबा 2.17 हेक्टेयर भूमि बद्री कुशवाह, बैजंती एवं दाना कुशवाह के स्वामित्व में दर्ज थी। खातेदारों द्वारा आपसी सहमति से केवल 0.50 हेक्टेयर भूमि का ही विक्रय किया गया था, जिसका विधिवत रजिस्टर्ड विक्रय पत्र मलकीत कौर पत्नी सिकतार सिंह के नाम संपादित कराया गया था।
बद्री कुशवाह ने बताया कि उनके हिस्से की 0.078 हेक्टेयर, बैजंती की 0.180 हेक्टेयर और दाना कुशवाह की 0.240 हेक्टेयर भूमि ही विक्रय की गई थी, जबकि शेष भूमि खातेदारों के पास सुरक्षित थी। आरोप है कि नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान पटवारी एवं तहसील स्तर पर गंभीर त्रुटि करते हुए खरीदार के नाम 1.02 हेक्टेयर भूमि का नामांतरण कर दिया गया, जिसमें खातेदारों की शेष भूमि भी शामिल कर दी गई।
पीड़ित के अनुसार इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब वे खाद लेने के लिए कृषि विभाग में दस्तावेज लगाने पहुंचे। दस्तावेजों की जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में भूमि का रकबा कम दिखाया गया, तब उन्हें पता चला कि उनकी बची हुई जमीन भी नामांतरण में चली गई है।
इसके बाद बद्री कुशवाह ने कोलारस तहसील के तहसीलदार कार्यालय में आवेदन दिया, लेकिन लंबे समय बीतने के बावजूद कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि राजस्व कर्मचारियों की लापरवाही के कारण खातेदारों को अपनी ही भूमि से बेदखली जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें क्षति हो रही है।
अब पीड़ित खातेदारों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, गलत नामांतरण को निरस्त किया जाए और उनकी शेष भूमि को पुनः राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराया जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।


