करैरा—डीपीसी दफेदार सिंह सिकरवार के निर्देशन एवं बीआरसीसी विनोद तिवारी के मार्गदर्शन में जन शिक्षा केंद्र शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करैरा में कक्षा 6 से 8 तथा कक्षा 3 से 5 पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए एक अत्यंत उपयोगी शैक्षिक संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें पुनरावलोकन, समेकन तथा प्राथमिक कक्षाओं में प्रभावी लेखन कौशल को विकसित करने पर गहन चर्चा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई, जिसके बाद उपस्थित शिक्षकों ने सामूहिक रूप से सरस्वती वंदना गाई और फिर एक प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत कर माहौल को उत्साहपूर्ण बनाया। जन शिक्षा केंद्र प्रभारी अरविंद यादव ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षक इस केंद्र से जो भी नई तकनीकें, विचार या शिक्षण विधियां ग्रहण करें, उन्हें अनिवार्य रूप से अपने स्कूलों में बच्चों तक पहुंचाएं, क्योंकि शिक्षा का सच्चा लाभ तभी संभव है जब ज्ञान सीधे विद्यार्थियों तक पहुंचकर उनके जीवन को समृद्ध करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक कक्षा में केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माता होते हैं, इसलिए नई सीख को तुरंत अमल में लाना जरूरी है। इसी क्रम में बीएसी महेश कुमार लोधी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए बताया कि शैक्षिक संवाद का मूल लक्ष्य सीखने की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सरल, रोचक और आनंददायक बनाना है, ताकि बच्चे पढ़ाई से ऊबें नहीं बल्कि उसका आनंद उठाएं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिक्षक का एक छोटा-सा सकारात्मक संवाद किसी बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है और उसके जीवन की दिशा-दशा पूरी तरह बदल सकता है, इसलिए कक्षा में संवाद को केवल माध्यम नहीं बल्कि शिक्षा का केंद्र बनाना चाहिए। इस अवसर पर जन शिक्षक संदेश जैन, बृजमोहन बरार, आरती गुप्ता, रविंद्र श्रीवास्तव, मोहर सिंह बघेल, राकेश पाठक, रामकुमारी लोधी, अनिल लोधी, रामदेवी करोठिया, पूर्ति तिवारी सहित दर्जनों अन्य शिक्षकों ने बड़ी उत्सुकता और सक्रियता के साथ भाग लिया तथा शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने अनुभव, चुनौतियां और सफल प्रयोग साझा किए। शिक्षकों ने विशेषकर प्राथमिक स्तर पर लेखन कौशल को मजबूत करने, बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने तथा पाठ्यक्रम के समेकन के नए-नए तरीकों पर विचार-विमर्श किया। इस संवाद ने न केवल शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया बल्कि आने वाले दिनों में कक्षाओं में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित हुआ। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने इस आयोजन की सराहना की और भविष्य में ऐसे शैक्षिक संवादों को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की, ताकि शिक्षक निरंतर नई तकनीकों से जुड़े रहें और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकें। इस कार्यक्रम ने शिक्षकों को नई प्रेरणा, ऊर्जा और दिशा प्रदान की तथा वे अपने-अपने विद्यालयों में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण हेतु और अधिक समर्पित हो गए।
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