पौष शुक्ल पक्ष का आध्यात्मिक महत्व: सूर्य पूजा और धार्मिक अनुष्ठान कैसे करें? Ujjain Paush Sun Worship Starts

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पौष शुक्ल पक्ष का आध्यात्मिक महत्व: सूर्य पूजा और धार्मिक अनुष्ठान कैसे करें? Ujjain Paush Sun Worship Starts

उज्जैन में, सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, आज (20 दिसंबर) से पौष मास का दूसरा पक्ष, शुक्ल पक्ष, विधिवत रूप से प्रारंभ हो गया है।

इस पवित्र महीने में सूर्य देव की पूजा का विशेष विधान है, क्योंकि सर्दियों के इन दिनों में प्रातः काल की सूर्य की किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान हैं।

सुबह कुछ देर धूप सेंकने से हमें विटामिन डी प्राप्त होता है और यह दिन भर के कार्यों के लिए ऊर्जा का संचार करती है।

पौष मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी और एकादशी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक व्रतों का विशेष महत्व बताया गया है, जिनमें विशेष रूप से पुत्रदा एकादशी का उल्लेख है।

उज्जैन के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मतानुसार, इस पौष मास में हमें अपने स्वास्थ्य पर अतिरिक्त ध्यान देना चाहिए।

इस अवधि में हमें अपने आहार में ऐसी वस्तुओं को शामिल करना चाहिए जिनकी तासीर गर्म हो, जैसे तिल और गुड़।

इन पौष्टिक पदार्थों का सेवन हमारे शरीर को ठंड से संबंधित बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार करता है।

पौष मास में सूर्योदय से पूर्व उठना और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए, तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें कुमकुम, चावल और लाल पुष्प डालने चाहिए।

इसके उपरांत, उगते हुए सूर्य देव के दर्शन करते हुए, दोनों हाथों को ऊपर उठाकर लोटे से जल अर्पित करें।

इस दिव्य अनुष्ठान के दौरान, सूर्य मंत्र ‘ऊँ सूर्याय नमः’ का जप कम से कम 11 बार करना चाहिए, जिससे आध्यात्मिक लाभ और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

यह *पूजा* और *धर्म* से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्य है जो शरीर और मन को शांति प्रदान करता है।

  • पौष शुक्ल पक्ष का प्रारंभ, सूर्य पूजा और स्वास्थ्य का धार्मिक महत्व उजागर हुआ।
  • पुत्रदा एकादशी व पौष पूर्णिमा जैसे प्रमुख धार्मिक व्रत इस पक्ष में सम्पन्न होंगे।
  • सेहत हेतु तिल-गुड़ सेवन और सूर्य को अर्घ्य देने की विशेष विधि का उल्लेख।

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Posted on 20 December 2025 | Visit सत्यालेख.com for more stories.

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