रहवासियों का कहना है कि अब नगर पालिका द्वारा नई पाइपलाइन बिछाने के नाम पर 300 रुपए प्रति परिवार की मांग की जा रही है। इससे पहले ही परेशान लोग अब आर्थिक बोझ से भी जूझने को मजबूर हैं।
स्थानीय महिला गीता रजक ने बताया कि नाली से होकर गुजर रही फूटी पाइपलाइन की शिकायत दर्ज कराई गई थी, ताकि गंदा पानी घरों तक पहुंचना बंद हो सके। लेकिन नगर पालिका ने समस्या सुधारने की जगह बोरवेल की पाइपलाइन का कनेक्शन ही काट दिया। इससे हालात और विकराल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले गंदे पानी से किसी तरह घर का काम चल जाता था, लेकिन अब उस पानी से भी मोहताज कर दिया गया है।
गुड्डी सेन ने बताया कि उनके क्षेत्र में अब तक सिंध जलावर्धन योजना के तहत मणीखेड़ा की पाइपलाइन नहीं बिछाई गई है। ऐसे में सरकारी बोरवेल के सहारे जैसे-तैसे काम चल रहा था। लेकिन अब वह लाइन भी काट दी गई है। मजबूरी में सभी रहवासियों को पानी भरने के लिए दूर लगे बोरवेल तक जाना पड़ रहा है, जिससे खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी दिक्कत हो रही है।
वहीं ममता सेन ने बताया कि पानी की पाइपलाइन नाली के अंदर से डाली गई थी। पाइपलाइन फूटने के कारण नाली का गंदा पानी पाइप के जरिए घरों तक पहुंच रहा था। इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन नगर पालिका ने पाइपलाइन सुधारने या नाली से बाहर नई लाइन डालने के बजाय पूरी लाइन ही काट दी। इससे समस्या खत्म होने की बजाय और बढ़ गई है।
इलाके के रहवासियों का आरोप है कि शिकायत करना उनके लिए महंगा सौदा बन गया। न तो सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था की गई और न ही कोई वैकल्पिक इंतजाम। अब लोग मजबूर होकर दूर-दराज से पानी लाने को विवश हैं।
रहवासियों ने मांग की है कि नगर पालिका तत्काल बिना किसी शुल्क के नई पाइपलाइन बिछाए, सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था करे और समस्या का स्थायी समाधान निकाले, ताकि आम नागरिकों को शिकायत करने की “सजा” न भुगतनी पड़े।
नगर पालिका के इंजीनियर रंजीत ने बताया कि उक्त स्थान पर रविवार तक सिंध जलावर्धन योजना के तहत बिछाई गई लाइन से जोड़ दिया जायेगा। जिससे लोगों को पानी की परेशानियों से निजात मिल सके।



