कलेक्टर चौधरी ने गर्भवती महिलाओं के पंजीयन में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के आंकड़ों में पाए गए अंतर को आपसी समन्वय से शीघ्र समाप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के प्रभावी प्रबंधन, टीवी रोगियों की एक्स-रे जांच में वृद्धि, आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा एनआरसी में बच्चों के शत-प्रतिशत भर्ती किए जाने के निर्देश दिए। कलेक्टर द्वारा विभागीय उपलब्धियों की पुनः समीक्षा 8 दिवस बाद किए जाने की जानकारी दी गई।
बैठक में टीवी रोगियों की एक्स-रे जांच, एनआरसी में भर्ती बच्चों की स्थिति, गर्भवती महिलाओं की चार एएनसी जांच, एनीमिया प्रबंधन, आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर दवाओं की उपलब्धता, मातृ एवं शिशु मृत्यु, एचडब्ल्यूसी, आयुष्मान कार्ड, एनसीडी एवं टीकाकरण कार्यक्रम की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
कलेक्टर चौधरी ने एफसीएम इंजेक्शन की उपलब्धि कम होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मध्यम एवं गंभीर एनीमिया के प्रभावी प्रबंधन के निर्देश दिए। एएनसी पंजीयन में कम प्रगति वाले क्षेत्र बदरवास के बीसीएम एवं सुपरवाइजर को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर दवाओं की उपलब्धता का औसत निकालकर दो दिवस में शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में खनियाधाना विकासखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश जिला अधिकारियों को दिए गए। साथ ही गर्भवती महिलाओं एवं कुपोषित हितग्राहियों को पोषण आहार समय पर वितरण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.संजय ऋषीश्वर, जिला कार्यक्रम अधिकारी धीरेन्द्र जादौन, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनीता पाल, डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. सुनील खंडोलिया, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रोहित भदकारिया, जिला क्षय अधिकारी डॉ. आशीष व्यास, डीपीएम डॉ. शीतल व्यास सहित सभी विकासखंडों के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, सीडीपीओ, सुपरवाइजर, वीपीएम एवं वीसीएम उपस्थित रहे।


