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चाय बागान: मजदूरों को जमीन देने से इनकार पर सहायता रोकेगी सरकार Assam Cm Warns Tea Owners
गुवाहाटी: सत्यालेख की रिपोर्ट के अनुसार, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने चाय बागान मालिकों को कड़ी चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि यदि वे चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों को जमीन का मालिकाना हक देने से इनकार करते हैं, तो सरकार उन्हें दी जाने वाली सभी प्रकार की सहायता तत्काल प्रभाव से रोक देगी।
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने पहले ही विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस संबंध में एक कानून पारित कर दिया है, जिसका उद्देश्य चाय बागानों के मजदूरों को उनके घरों और जमीन का पूर्ण स्वामित्व प्रदान करना है।
सरकार का यह फैसला चाय बागान मजदूरों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने आगे कहा कि कुछ चाय बागान मालिकों की प्रतिक्रिया इस मामले में उत्साहजनक नहीं रही है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी बागान मालिक इस मामले में सरकार के साथ सहयोग करने से इनकार करेगा, उसे सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता से वंचित कर दिया जाएगा।
सरकार प्रति वर्ष चाय बागानों को लगभग 150 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करती है, और यदि कोई भी मालिक कानूनी अड़चनें पैदा करने की कोशिश करता है, तो सरकार इस सहायता पर पुनर्विचार करेगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि चाय उद्योग के 200 वर्षों के इतिहास में, अब मजदूरों का यह अधिकार है कि उन्हें अपनी जमीन का पूरा मालिकाना हक मिले, और सरकार इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और मजदूरों को जल्द ही उनका हक मिलेगा।
यह कदम राज्य के चाय उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, जिससे मजदूरों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
इस फैसले का असर निश्चित रूप से आने वाले दिनों में राज्य के "उद्योग" और "मार्केट" पर दिखाई देगा, क्योंकि "निवेश" और "वित्त" के नए अवसर खुलेंगे।
- मजदूरों को जमीन का हक न देने पर चाय बागान मालिकों को सहायता नहीं मिलेगी।
- सरकार चाय बागानों को हर साल 150 करोड़ रुपये की सहायता देती है।
- जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, मजदूरों को जल्द मिलेगा हक।
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Posted on 02 January 2026 | Check सत्यालेख.com for more coverage.
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