यह फैसला न्यायमूर्ति जी. एस. अहलूवालिया की एकलपीठ ने सुनाया। याचिका में रामनिवास रावत ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2024 के उपचुनाव में नामांकन पत्र दाखिल करते समय मुकेश मल्होत्रा ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी।
याचिका के अनुसार मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र में केवल दो आपराधिक मामलों का उल्लेख किया था, जबकि उनके खिलाफ कुल छह मामले दर्ज बताए गए थे। अदालत ने चार मामलों की जानकारी छिपाने को गंभीर मानते हुए उनके चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया।
गौरतलब है कि 23 नवंबर 2024 को आए उपचुनाव परिणाम में मुकेश मल्होत्रा ने पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को लगभग सात हजार मतों से हराया था। लेकिन अदालत के ताजा फैसले के बाद अब रामनिवास रावत को विजयपुर विधानसभा क्षेत्र का विधायक घोषित कर दिया गया है।
फैसले के बाद रामनिवास रावत ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताया। वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस निर्णय को भारत का सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा कि फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जाएगी।
इधर मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि विजयपुर की जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया था और पार्टी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वहां से न्याय मिलेगा।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विजयपुर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।


