कार्यक्रम में विकासखंड समन्वयक शिशुपाल सिंह जादौन ने कहा कि यदि हम संभावित आपदाओं से होने वाली हानि का सही आकलन कर लें और पहले से ही उसके बचाव के उपायों के प्रति जागरूक रहें, तो हम बड़ी क्षति से स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे सतर्क रहें और आपदा प्रबंधन के नियमों को अपनाएं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन ग्राम करमई के आदिवासी प्राथमिक बालक आश्रम शाला में ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति धुवांनी द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक केशव शर्मा ने भूकंप, बाढ़, जंगल की आग, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात और लू जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय सावधानियां और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आपदा से पहले तैयारी करना बेहद जरूरी है। इसके लिए गांव स्तर पर आपदा प्रबंधन समिति का गठन, पूर्व सूचना एवं चेतावनी दल, खोज एवं बचाव दल, प्राथमिक चिकित्सा दल, जल एवं स्वच्छता दल तथा राहत एवं पुनर्वास दल की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम में पूर्व सरपंच महेश धाकड़, सरपंच केशव आदिवासी, पंचायत सचिव लक्ष्मण धाकड़, छात्रावास अधीक्षक मुक्ता गुप्ता, नवांकुर संस्था प्रमुख उत्तम सिंह धाकड़ सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, शिक्षक, प्रस्फुटन समिति सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान परामर्शदाताओं द्वारा ग्रामीणों से विगत वर्षों में आई आपदाओं की जानकारी ली गई और भविष्य में संभावित आपदाओं के लिए तैयार रहने के उपायों पर चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों को स्वल्पाहार कराया गया। अंत में प्रस्फुटन समिति सचिव सोवरन धाकड़ ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीणों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ और उन्हें आपदा के समय सतर्क एवं सुरक्षित रहने की दिशा में प्रेरित किया गया।


