प्रयासों में नहीं रही कोई कमी: हर वार्ड को दी विकास की सौगात
विधायक देवेंद्र जैन ने दूरदर्शिता दिखाते हुए मार्च 2024 में ही कायाकल्प 2.0 योजना के तहत शहर के सभी 39 वार्डों के लिए 3.52 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर कराया था। उनका लक्ष्य स्पष्ट था—शिवपुरी की हर गली को पक्का करना। शुरुआती दौर में उनके प्रयासों से 23 सड़कों का जाल बिछाया भी गया, लेकिन शेष 16 सड़कों में नगर पालिका प्रशासन और ठेकेदारों की लापरवाही आड़े आ गई।
अपनी ही सरकार के सिस्टम के खिलाफ 'जनता' के लिए खड़े हुए विधायक
अक्सर जनप्रतिनिधि अपनी ही पार्टी की नगर सत्ता के खिलाफ बोलने से बचते हैं, लेकिन देवेंद्र जैन ने 'जनहित' को प्राथमिकता दी है। जब उन्हें पता चला कि ठेकेदारों के भुगतान में भेदभाव हो रहा है और उनके वार्ड 8 (महल कॉलोनी) सहित अन्य वार्डों में काम रुके हुए हैं, तो उन्होंने नगर पालिका के अधिकारियों को फटकार लगाने के साथ-साथ अब उच्च स्तर पर इस लड़ाई को ले जाने का फैसला किया है।
क्यों अटके काम? (विधायक के प्रयासों के बावजूद)
विधायक द्वारा बजट उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कुछ बाधाएं सामने आईं:
ठेकेदारों की लापरवाही: कई फर्मों (जैसे श्री वर्धा ग्रुप और गणेश गौशाई कंस्ट्रक्शन) ने टेंडर लेने के बाद भी काम शुरू नहीं किया।
नपा प्रशासन की सुस्ती: भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण ठेकेदारों ने रुचि दिखाना कम कर दिया।
नगर पालिका की राजनीति: पार्षदों और अध्यक्ष के बीच आपसी खींचतान ने विधायक के विकास विजन को प्रभावित करने की कोशिश की।
अब उम्मीद की नई किरण: फिर से शुरू हुई टेंडर प्रक्रिया
विधायक के लगातार दबाव का ही असर है कि नगर पालिका ने अब लापरवाह ठेकेदारों के टेंडर निरस्त कर दिए हैं। नगर पालिका के एई सचिन चौहान के अनुसार, विधायक की प्राथमिकता को देखते हुए अब नए टेंडर जारी किए जा रहे हैं ताकि मानसून से पहले या उसके तुरंत बाद विकास कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा किया जा सके।
"मैंने दो साल पहले ही बजट स्वीकृत करवा दिया था। जनता के प्रति मेरी जवाबदेही है। अगर नगर पालिका प्रशासन सड़कों का काम समय पर पूरा नहीं कर रहा है, तो मैं विधानसभा में मामला उठाकर सीधे सरकार से जवाब मांगूंगा।"
— देवेंद्र जैन, विधायक शिवपुरी


