प्राचार्य के इंतजार में लगभग 40 से 50 अतिथि शिक्षक विद्यालय परिसर में घंटों बैठे रहे। इनमें कई शिक्षक दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे थे, जिन्हें भीषण गर्मी और अव्यवस्था के बीच परेशानी का सामना करना पड़ा। शिक्षकों का कहना है कि वे समय पर पहुंच गए थे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के अनुपस्थित रहने से सत्यापन प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों ने प्राचार्य से देरी को लेकर सवाल पूछे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सवालों पर प्राचार्य नाराज हो गईं, जिससे मौके पर बहस की स्थिति बन गई।
अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही समय का पालन नहीं करेंगे, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी। शिक्षकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले में संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और भविष्य में ऐसी अव्यवस्थाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


