स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिंध नदी के घाटों पर लंबे समय से अवैध रेत खनन का कारोबार जारी है। दिन के उजाले में मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए नदी से रेत निकाली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद खनिज विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह से लेकर देर शाम तक नदी किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही बनी रहती है। नदी से रेत निकालकर आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई की जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में हो रहे इस कारोबार की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं है, या फिर सब कुछ उनकी जानकारी में ही चल रहा है?
अवैध उत्खनन के कारण सिंध नदी के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि नदी से लगातार रेत निकाले जाने से जलस्तर प्रभावित हो सकता है, साथ ही नदी किनारों के कटाव का खतरा भी बढ़ रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सिंध नदी में हो रहे अवैध रेत उत्खनन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध खनन का यह खेल और तेजी से बढ़ेगा तथा प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचेगा।
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर किसकी मर्जी से सिंध नदी से दिनदहाड़े अवैध रेत का कारोबार चल रहा है? क्या खनिज विभाग की चुप्पी किसी बड़े संरक्षण की ओर इशारा कर रही है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं? यह सवाल आमजन के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।


