जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत की सरपंच गायत्री जाटव द्वारा जनपद पंचायत कार्यालय में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन में बताया गया कि सरपंच के डिजिटल हस्ताक्षर (डीएससी) का दुरुपयोग किया जा रहा है। सरपंच का आरोप है कि गांव का ही व्यक्ति राधे जाट कई दिनों से उनका ज्यूडिटर साइन डीएससी अपने पास रखे हुए है और उसी के माध्यम से ग्राम पंचायत खाते से राशि निकाली जा रही है।
सरपंच ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले की जानकारी पंचायत सचिव विजय सिंह कुशवाहा को होने के बावजूद लगातार निर्माण कार्यों और अन्य भुगतान प्रक्रियाओं को जारी रखा गया। जबकि नियमानुसार डीएससी केवल अधिकृत व्यक्ति के पास होना चाहिए और उसके बिना किसी भी प्रकार का भुगतान या वित्तीय प्रक्रिया अवैधानिक मानी जाती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीईओ दिनेश शाक्य ने सचिव विजय सिंह कुशवाहा को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी ग्राम पंचायत के सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर से प्रस्ताव लगाकर लगभग 35 लाख रुपए सचिव विजय कुशवाह द्वारा निकाल दिए और दलित महिला सरपंच गायत्री बाई जाटव को पता नहीं चला क्योंकि उसकी सिम और बीएसई डोंगल ग्राम के दबंग व्यक्ति के पास है वह सचिव के साथ मिलकर रुपए निकाल लेता है जिसकी शिकायत सरपंच गायत्री बाई जाटव द्वारा जनपद पंचायत के मुख्य अधिकारी एवं कोलारस एसडीएम कार्यालय में की है जनपद पंचायत से एक नोटिस भी सचिव विजय कुशवाह को जारी हुआ है इस खेल में इंजीनियर और सहायक यंत्री की भूमिका भी जान पड़ती है क्योंकि फर्जी हस्ताक्षर के कामों की स्वीकृति कैसे मिल जाती है यह जांच का विषय है
इसी बीच पंचायत सचिव पर एक और आरोप सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र में उपयोग होने वाली मोटर का भी सचिव द्वारा निजी कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। आरोप है कि पंचायत की शासकीय सामग्री को निजी उपयोग में लेकर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्राम पंचायत बेहटा में सामने आए इन आरोपों के बाद पंचायत व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सभी की निगाहें जनपद पंचायत प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


