सुबह ताला, शाम को मेला चालू! सिद्धेश्वर बाणगंगा मेले में आखिर चल क्या रहा है?

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 शिवपुरी का ऐतिहासिक सिद्धेश्वर बाणगंगा मेला इन दिनों श्रद्धा, व्यापार और मनोरंजन से ज्यादा प्रशासनिक व्यवस्थाओं और विवादों को लेकर चर्चा में है। मेले को लेकर ऐसी स्थिति सामने आई है, जिसने आम जनता, व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दिन में मेले के मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रशासन का ताला नजर आता है, लेकिन शाम होते-होते वही मेला पूरी रौनक के साथ संचालित होने लगता है। दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ दिखाई देती है, बच्चों के झूले चलते हैं और मेले में चहल-पहल देखने को मिलती है।

जानकारी के अनुसार प्रशासन ने मेले के आयोजन को लेकर आवश्यक अनुमति और नियमों का हवाला देते हुए मुख्य गेट पर ताला लगाकर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा था कि मेला पूरी तरह बंद रहेगा। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय मेले की गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं और बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे हैं।

यही वजह है कि अब शहरभर में यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर जब प्रशासन ने मेला बंद करने की कार्रवाई की है, तो फिर मेले का संचालन किसके आदेश पर हो रहा है? यदि अनुमति नहीं है तो दुकानों और अन्य गतिविधियों को संचालित करने की अनुमति किसने दी? और यदि मेला चलाने की अनुमति दे दी गई है, तो फिर गेट पर ताला लगाने का औचित्य क्या है?

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। यदि मेला नियमों के अनुरूप नहीं है तो उसे पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए, और यदि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं तो फिर व्यापारियों और आम जनता को भ्रमित करने वाली स्थिति क्यों बनाई जा रही है।

मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों के सामने भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि वे कई दिनों से अनिश्चितता के माहौल में काम कर रहे हैं। कभी मेला बंद होने की सूचना मिलती है तो कभी संचालन शुरू हो जाता है। ऐसे में उनके व्यवसाय और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।

वहीं मेले में आने वाले लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस पूरे मामले पर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देनी चाहिए। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर मेले की वर्तमान स्थिति क्या है, अनुमति मिली है या नहीं, और यदि नहीं मिली है तो फिर गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं।

शिवपुरी का सिद्धेश्वर बाणगंगा मेला वर्षों पुरानी परंपरा और आस्था से जुड़ा आयोजन है। हर साल हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे में इस तरह की विरोधाभासी स्थिति न केवल प्रशासनिक सवाल खड़े करती है, बल्कि जनता के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा करती है।

फिलहाल शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है—"जब गेट पर ताला है, तो मेला किसके भरोसे और किसके आदेश पर चल रहा है?" अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम और आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं। जनता उम्मीद कर रही है कि जल्द ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और सभी सवालों के जवाब मिलेंगे।

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