वीडियो में दिख रहा यह व्यक्ति पिछले तीन घंटे से अपने मरीज के इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहा है। पीड़ित का आरोप है कि अस्पताल में न तो कोई सुनवाई हो रही है और न ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। गंभीर रूप से बीमार मरीज के लिए न तो ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई और न ही उसे मगरोनी रेफर करने के लिए एम्बुलेंस मिल पा रही है।
कोई सुनवाई नहीं है नरवर में... न ऑक्सीजन है, न गाड़ी है। हमें यहाँ आए तीन घंटे हो गए हैं। डॉक्टर साहब बस कह रहे हैं कि 'आ रही है, आ रही है'। अगर गाड़ी नहीं आई, तो मरीज तो वैसे ही निपट जाएगा!"
अस्पताल काउंटर और स्टाफ रूम के बाहर जमा भीड़]
यह दुर्दशा सिर्फ एक मरीज की नहीं है। वीडियो के अगले हिस्से में साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल के दवा वितरण और स्टाफ रूम के बाहर भारी भीड़ जमा है। परिजनों का सब्र का बांध टूट चुका है और वे ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से तीखी बहस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इमरजेंसी के समय भी डॉक्टर और स्टाफ अपनी सीट से नदारद रहते हैं या केवल आश्वासन देते हैं।
ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच, नरवर अस्पताल की यह तस्वीर प्रशासनिक दावों की पोल खोलती है। अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या आम जनता को सही समय पर इलाज मिल पाता है या नहीं।


