जिसके जीवन में संतोष रूपी धन हैं वही मनुष्य सुखी हो सकता है - बृजभूषण महाराज

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कोलारस । कोलारस के अंतर्गत आने वाले ग्राम अनंतपुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर रुक्मिणी विवाह उत्सव पर आचार्य श्री बृजभूषण जी महाराज ने बताया की जिसके पास में संतोष रूपी धन हैं वह मनुष्य हमेशा सुखी रहता है इसके विपरीत जो व्यक्ति संतुष्ट नहीं रहता उसको जितना धन मिलता जाता है वह उतना ही पाने को और लालायित होता जाता है एवं और आशा करता जाता है ऐसा व्यक्ति उसके पास सब कुछ होते हुए भी दुःखी ही रहता है क्योंकि उस व्यक्ति  की बुद्धि में यह भाव बना रहता है कि और धन मिल जाए और धन मिल जाए जबकि उसके पास जो है उसका आनंद वह भोग भी नहीं पाता इसलिए मनुष्य को चाहिए कि अपने जीवन में संतुष्ट रहना सीखें एवं आगे बढ़ने का प्रयास करे , क्योंकि संसार में धन की आवश्यकता सिर्फ़ मनुष्य को है बाकी चौरासी लाख योनियों में और किसी भी जीव को धन की आवश्यकता नहीं पड़ती क्या वह जीव जंतु सुखी नहीं रहते ,क्या क्या वह खाते नहीं है, क्या वह सोते नहीं है, सब कुछ करते हैं परंतु मनुष्य के मन में धारणा बन चुकी है कि धन के अलावा वह जीवित ही नहीं रह सकता और यह धारणा उसके जीवन में सबसे बड़ा दुख का कारण है , आचार्य जी ने कथा प्रसंग में सुंदर रासलीला का वर्णन सुनाया और बताया कि रासलीला भगवान की एक अद्भुत लीला थी गोपियों को प्रसन्न करने के लिए ही भगवान ने इसको किया ,भगवान ने आगे चलकर के कंस का वध किया क्योंकि वह महापापी संतों को और भक्तों को दुख प्रदान करता था भगवान ने उसका उद्धार किया भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मिणी जी के साथ विवाह किया और उनसे विवाह करके भगवान ने अपना प्रथम विवाह संपन्न किया इस कथा का आयोजन 3 जून से 10 जून तक किया जा रहा है एवं यह कथा प्रजापति परिवार द्वारा आयोजित की जा रही है

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