कल्लू महाराज का कहना है कि बरसात के दिनों में पशु चिकित्सालय परिसर चारों ओर से जलभराव की चपेट में आ जाता है। इससे अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और पशुओं के उपचार में भी बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल के समीप विद्युत विभाग की एक डीपी भी स्थापित है। बरसात के दौरान परिसर में पानी भरने की स्थिति में यह डीपी सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय बन जाती है। उन्होंने संबंधित विभागों से मांग की कि विद्युत सुरक्षा के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
समाजसेवी कल्लू महाराज ने यह भी मांग की कि पशु चिकित्सालय के चारों ओर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। उनका कहना है कि अस्पताल राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित होने के बावजूद वहां तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क सुविधा नहीं है। बरसात के समय कीचड़ और जलभराव के कारण पशुओं को अस्पताल तक लाना और ले जाना अत्यंत कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि दिनारा पशु चिकित्सालय लगभग 70 गांवों के पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। इसलिए यहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने अस्पताल में ऑक्सीजन सुविधा, शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) के लिए आवश्यक उपकरण, डिजिटल एक्स-रे मशीन, हड्डी की जांच के लिए आधुनिक मशीनें, गंभीर रूप से घायल पशुओं के उपचार के लिए आवश्यक संसाधन तथा अन्य आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे गौवंश सहित अन्य पशुओं और पक्षियों का बेहतर एवं समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
कल्लू महाराज ने पशुपालन मंत्री, जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि अस्पताल की वर्तमान स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र कराए जाएं। उनका कहना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि शासन इस ओर गंभीरता से ध्यान देता है तो दिनारा सहित आसपास के 70 गांवों के हजारों पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और पशुओं के उपचार की व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी हो सकेगी।

