आवेदन के अनुसार, 1 जुलाई 2026 की शाम करीब 4 बजे सचिन गुर्जर अपने घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान गांव के ही आनंद गुर्जर एवं उदयभान गुर्जर उसे पकड़कर अपने घर ले गए। आरोप है कि वहां पुरानी कहासुनी को लेकर मासूम के दाहिने हाथ के अंगूठे और एक उंगली पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया, जिससे उसकी उंगलियां गंभीर रूप से घायल हो गईं।
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद जब उन्होंने विरोध किया तो आरोपियों ने पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। अगले दिन 2 जुलाई को आरोपियों द्वारा दोबारा घर पर लाठी-डंडों से हमला करने का भी आरोप लगाया गया है।
रामवीर गुर्जर ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि जब वे बदरवास थाने रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें घंटों बैठाए रखा। बाद में पता चला कि आरोपी पक्ष की ओर से पहले ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई, जबकि उनके अनुसार उन्होंने किसी प्रकार की मारपीट नहीं की। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उनके पुत्र का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए तथा परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी आरोपियों की होगी।
फिलहाल यह मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच चुका है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और पुलिस का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


