मोरम और मिट्टी के अवैध कारोबार की भेंट चढ़ा जलस्रोत हवा में लटका हैंडपंप बना विकास और जवाबदेही पर बड़ा सवाल

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 मध्य प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। "जल है तो कल है", "कैच द रेन" और जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने तथा भूजल संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर ने इन प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


वायरल तस्वीर में एक हैंडपंप जमीन से कई फीट ऊपर हवा में लटका दिखाई दे रहा है। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उसके आसपास बड़े पैमाने पर मिट्टी या मोरम का उत्खनन किया गया, जिससे हैंडपंप का आधार ही समाप्त हो गया। यदि यह तस्वीर वास्तविक है, तो यह केवल एक हैंडपंप की नहीं, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।


समाजसेवी कल्लू महाराज ने इस मामले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हैंडपंप केवल लोहे का एक ढांचा नहीं होता, बल्कि यह इंसानों, पशु-पक्षियों और राहगीरों के लिए जीवनदायिनी जलधारा का माध्यम है। यदि अवैध उत्खनन के कारण ऐसे जलस्रोत प्रभावित हो रहे हैं, तो यह आने वाली पीढ़ियों के जल अधिकारों पर भी सीधा संकट है।


उन्होंने कहा कि मिट्टी और मोरम के अवैध कारोबार पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए तथा वायरल तस्वीर की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि संबंधित स्थान पर किसकी अनुमति से खुदाई हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। यदि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।


पर्यावरण विशेषज्ञ भी समय-समय पर चेतावनी देते रहे हैं कि अनियंत्रित उत्खनन से भूजल स्तर प्रभावित होता है, मिट्टी का कटाव बढ़ता है और सार्वजनिक जलस्रोतों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में जल संरक्षण अभियान तभी सफल हो सकते हैं, जब प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर प्रभावी नियंत्रण और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।


स्थानीय लोगों का कहना है कि हैंडपंप गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में आज भी पेयजल का महत्वपूर्ण साधन हैं। यदि इनके आसपास इस प्रकार की खुदाई होती रही, तो भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।


समाजसेवी कल्लू महाराज ने मुख्यमंत्री तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि वायरल तस्वीर की सत्यता की जांच कराई जाए, अवैध उत्खनन में शामिल लोगों की पहचान की जाए और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन स्थानों पर जलस्रोत खतरे में हैं, वहां तत्काल संरक्षणात्मक कदम उठाए जाएं ताकि "जल है तो जीवन है" का संदेश केवल नारा बनकर न रह जाए, बल्कि धरातल पर भी दिखाई दे।

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