क्या है पूरा मामला?
जिला अस्पताल शिवपुरी के कैजुअल्टी वार्ड में इलाज के लिए आए एक बेबस बुजुर्ग के पैसे अचानक कहीं गुम हो गए। पैसे खो जाने के कारण बुजुर्ग बेहद परेशान और लाचार हो गए, और उनकी आँखों से आंसू छलक पड़े। अस्पताल के व्यस्त माहौल में जब नर्सिंग ऑफिसर शिवराज सिंह राजपूत की नजर इस बेबस बुजुर्ग पर पड़ी, तो वे तुरंत उनके पास पहुंचे।
कर्तव्य के साथ निभाया इंसानियत का धर्म:
बुजुर्ग की आपबीती सुनने के बाद शिवराज सिंह राजपूत ने बिना समय गंवाए तुरंत आगे आकर मोर्चा संभाला। उन्होंने न केवल बुजुर्ग के इलाज और आवश्यक दवाओं की पूरी व्यवस्था कराई, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी न हो। इतना ही नहीं, बुजुर्ग को सुरक्षित उनके घर वापस भेजने के लिए शिवराज जी ने अपनी जेब से किराए का इंतजाम भी किया।
आँखों के आंसू बदले मुस्कान में:
जब बुजुर्ग को इलाज मिला और घर जाने का सहारा, तो उनकी आँखों के आंसू एक बेफिक्र और सुकून भरी मुस्कान में बदल गए। अस्पताल परिसर में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने शिवराज सिंह राजपूत के इस सेवा भाव की जमकर सराहना की।
इस संवेदनशील कार्य पर बात करते हुए नर्सिंग ऑफिसर शिवराज सिंह राजपूत (मध्यप्रदेश नर्सिंग प्रतिनिधि वॉइस ऑफ़ नर्सेस) ने कहा, "एक स्वास्थ्य कर्मी होने के नाते मरीजों की सेवा करना हमारा पहला धर्म है। जब बुजुर्ग परेशान थे, तो मेरा दिल यह देख नहीं पाया। उनके चेहरे पर आई मुस्कान ही मेरे काम की सबसे बड़ी कमाई और संतुष्टि है।"
शिवराज सिंह राजपूत द्वारा पेश की गई मानवता और निस्वार्थ सेवा की यह मिसाल आज सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, और हर कोई उनके इस जज्बे को सलाम कर रहा है।


