शिवपुरी शहर के बीचों-बीच विकास के दावों को आईना दिखाती तस्वीर—कई बार गुहार के बाद भी नहीं बदली गरीब परिवारों की हालत
शिवपुरी। शहर के वार्ड क्रमांक 24 स्थित महल सराय में रहने वाले गरीब एवं आदिवासी परिवारों की जिंदगी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। एक तरफ शहर में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर इसी शहर में कुछ परिवार ऐसी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं, जहां बारिश होते ही छत से पानी टपकने लगता है और घर के अंदर रखा सामान भीग जाता है।
सबसे बड़ा सवाल उन मासूम बच्चों को लेकर है, जिनके सिर पर सुरक्षित छत तक नहीं है। तेज बारिश की रात में जब झोपड़ी की छत टपकती है, तब परिवारों के सामने यह सवाल खड़ा हो जाता है कि बच्चों को लेकर आखिर रात कहां गुजारें?
‘साहब, वोट के समय सब आते हैं, बाद में कोई नहीं पूछता’
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपनी समस्या लेकर कई बार नगर पालिका, वार्ड पार्षद और जनप्रतिनिधियों के पास जा चुके हैं। हर बार आश्वासन मिलता है कि समस्या का समाधान कराया जाएगा, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलेगा और बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात आज भी जस के तस हैं।
रहवासियों की पीड़ा है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि वोट मांगने उनके घरों तक पहुंचते हैं। बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वही लोग इन परिवारों को देखने तक नहीं आते।
यह कोई दूरदराज गांव नहीं, शिवपुरी शहर का वार्ड है
महल सराय की स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह कोई सुदूर ग्रामीण इलाका नहीं है। यह शिवपुरी नगर के वार्ड क्रमांक 24 का हिस्सा है। शहर में रहते हुए भी यदि गरीब परिवारों को सुरक्षित छत, पर्याप्त भोजन और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह निश्चित रूप से विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता है।
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखें और पात्र परिवारों का सर्वे कराकर उन्हें योजना का लाभ दिलाएं।
बारिश की हर बूंद गरीब परिवारों के लिए बन जाती है मुसीबत
बारिश शुरू होते ही इन परिवारों की चिंता बढ़ जाती है। झोपड़ी की कमजोर छत से पानी टपकता है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए परिवार रातभर जागने को मजबूर होते हैं। कई बार घर के अंदर रखे कपड़े, बिस्तर और खाने-पीने का सामान तक भीग जाता है।
गरीबी के कारण परिवार अपने स्तर पर पक्की छत बनाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उनकी उम्मीद अब शासन की योजनाओं और स्थानीय प्रशासन पर टिकी हुई है।
बच्चों की पढ़ाई से पहले जरूरी है सुरक्षित छत
गरीब परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा और भविष्य का सपना है, लेकिन जब घर ही सुरक्षित नहीं हो तो पढ़ाई पर ध्यान देना भी मुश्किल हो जाता है। रहवासियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर वास्तविक मदद और योजनाओं का लाभ चाहिए।
जनप्रतिनिधियों से सवाल नहीं, अब कार्रवाई की उम्मीद
महल सराय के परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सर्वे कराया जाए। जिन परिवारों के पास पक्का मकान नहीं है और जो शासन की पात्रता पूरी करते हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाए। साथ ही बारिश के दौरान किसी भी परिवार को परेशानी न हो, इसके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाए।
यह तस्वीर किसी एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उन गरीब लोगों की आवाज है जो वर्षों से सुनवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अब देखना यह है कि शिवपुरी प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस आवाज को सुनते हैं या फिर यह परिवार अगली बारिश में भी उसी टपकती छत के नीचे अपने बच्चों को लेकर रात गुजारने को मजबूर होंगे।
गरीबों को भाषण नहीं, सुरक्षित छत चाहिए…
वोट के समय याद रखने वालों को अब जिम्मेदारी निभानी होगी।


