कोलारस। लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया आरोग्य केंद्र उप स्वास्थ्य केंद्र भवन लुकवासा अपने उद्घाटन से पहले ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। नए भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही हैं, वहीं बारिश के दौरान भवन में पानी टपकने की शिकायत भी सामने आ रही है। इससे निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और जानकारी के अनुसार, भवन की दीवारों में आई दरारों को छिपाने के लिए उनमें सीमेंट भरकर बाद में रंग-रोगन कर दिया गया। लेकिन मरम्मत के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि भवन की खामियों को स्थायी रूप से दूर करने के बजाय उन्हें ढंकने का प्रयास किया गया।उद्घाटन से पहले ही सामने आई निर्माण की पोल जिस भवन को लंबे समय तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, यदि उसमें उपयोग शुरू होने से पहले ही दरारें और बारिश में पानी रिसने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, तो निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन का निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुसार और गुणवत्तापूर्ण सामग्री से हुआ है तो उद्घाटन से पहले ही इस तरह की समस्याएं क्यों सामने आ रही हैं
दरारों पर सीमेंट भरकर कर दी गई पुताई
सबसे गंभीर सवाल उन स्थानों को लेकर उठ रहे हैं, जहां दरारों में सीमेंट भरने के बाद रंग कर दिया गया। पुताई के बावजूद मरम्मत के निशान दिखाई देना इस बात की ओर संकेत करता है कि भवन में आई खामियों को छिपाने के लिए सतही स्तर पर काम किया गया। अब सवाल यह है कि क्या भवन की तकनीकी जांच कराई गई थी और क्या निर्माण एजेंसी ने निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन किया
सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल
स्वास्थ्य केंद्र जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक भवन के निर्माण में सरकारी धन खर्च होता है। ऐसे में निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की स्थिति में इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि शुरुआती दौर में ही भवन की हालत ऐसी है तो आने वाले वर्षों में इसकी स्थिति और खराब हो सकती है तथा सरकार को बार-बार मरम्मत पर अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
हालांकि, निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल सामने आई दरारों, पानी रिसने और मरम्मत के निशानों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर संदेह जरूर पैदा कर दिया है।
निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भवन का उद्घाटन कराने से पहले संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से मौके पर निरीक्षण कराया जाए। भवन की नींव, छत, दीवारों, प्लास्टर, जल निकासी तथा निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच हो और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भवन केवल उद्घाटन के लिए नहीं, बल्कि वर्षों तक जनता को सुरक्षित और बेहतर सुविधा देने के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए उद्घाटन की जल्दबाजी के बजाय पहले निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए।अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेकर भवन की तकनीकी जांच कराता है या फिर दरारों पर की गई पुताई के साथ ही मामले को भी दबा दिया जाता है।


