कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और विश्वास के चलते उन्होंने ओरछा धाम से गंगाजल लेकर डाक कांवड़ यात्रा निकाली। भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु लगातार भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े और दिनारा पहुंचकर विधि-विधान से भोलेनाथ का अभिषेक किया।
पहली डाक कांवड़ रामराजा की नगरी ओरछा धाम से लाकर अशोक होटल स्थित हनुमान मंदिर में विराजमान शिव परिवार को समर्पित की गई। यहां पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया गया। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करते हुए भक्ति में लीन नजर आए।
वहीं दूसरी डाक कांवड़ ग्राम जनकपुर स्थित खाती बाबा स्थान पर पहुंची, जहां मंदिर में विराजमान शिव परिवार एवं भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक किया गया। दोनों स्थानों पर धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना करते हुए सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
इस धार्मिक यात्रा में दीपक तिवारी, शिवम यादव, जितेंद्र लोधी, बहादुर लोधी, राजा लोधी, रोहित लोधी, मैथिली शरण गुप्ता, नाथू महाराज, बल्लू महाराज, राजू लोधी, गोविंद लोधी, हर्षित शर्मा एवं छोटू पाल सहित अन्य श्रद्धालु शामिल रहे।
गोसेवक कल्लू महाराज ने कहा कि भक्ति में ही शक्ति है और भगवान के प्रति सच्ची आस्था मनुष्य को कठिन परिस्थितियों से लड़ने का साहस देती है। उन्होंने कहा कि सभी भारतवासियों को भगवान के प्रति आस्था रखते हुए एकजुट होकर धर्म और सद्भाव के मार्ग पर चलना चाहिए। एकता और विश्वास के साथ बड़ी से बड़ी कठिनाई का सामना किया जा सकता है।
मंदिर के पुजारी ने भी श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भगवान के प्रति आस्था और समाज में एकता बनाए रखना जरूरी है। जब मनुष्य सच्चे मन से महादेव की आराधना करता है तो उसे कठिन समय में आत्मबल मिलता है। महादेव की भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव, सेवा और एकता का संदेश भी देती है।
ओरछा धाम से दिनारा तक करीब 55 किलोमीटर की दूरी दौड़ते हुए डाक कांवड़ लाने वाले श्रद्धालुओं की आस्था ने क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना दिया। गंगाजल से भगवान शिव के अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं के मुख से लगातार “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने कहा कि भगवान महादेव से बढ़कर कोई शक्ति नहीं और सच्ची भक्ति में ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति निहित है।


