ज्ञापन सौंपने पहुंचे समाज के लोगों का कहना था कि समान नागरिक संहिता को लेकर मुस्लिम समाज के बीच कई तरह की चिंताएं हैं। उनका आरोप है कि कानून का प्रभाव धार्मिक एवं व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। इसी को लेकर समाज ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
इस दौरान जमीयत उलेमा-ए-हिंद से जुड़े पदाधिकारियों और समाज के लोगों ने कहा कि संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता सहित विभिन्न अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में किसी भी कानून को लागू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले समुदायों की चिंताओं और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मुस्लिम समाज ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में UCC कानून पर पुनर्विचार करने तथा समाज की आशंकाओं का समाधान करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने के दौरान समाज के लोग शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखते नजर आए।
समाजजनों ने कहा कि उनका उद्देश्य अपनी संवैधानिक और लोकतांत्रिक आवाज को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करते हुए उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की।


