मामला ग्राम ककरई का है। यहां रहने वाले राजेंद्र यादव ने 21 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 13 भैंसें जंगल में चरने के लिए गई थीं, लेकिन कुछ देर बाद सभी भैंसें गायब हो गईं।
ग्रामीणों के साथ जब भैंसों की तलाश शुरू की गई तो उन्हें ग्राम बागवानी की तरफ ले जाने के संकेत मिले। इसी दौरान पुलिस को देखकर चोर घबरा गए और 13 भैंसों को वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गए।
पूछताछ में सामने आई पूरी कहानी
पुलिस ने जांच के बाद 1 सितंबर को जौरा थाना क्षेत्र के बुडावली निवासी अंके गुर्जर को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में अंके ने बताया कि उसे दल्लो गुर्जर ने भैंस चोरी के लिए बुलाया था। इसके बाद वह बंटी गुर्जर, हरेंद्र गुर्जर और करण सिंह गुर्जर के साथ बेहरदा पहुंचा।
आरोप है कि वहां एक व्यक्ति ने उन्हें खाना खिलाया और जंगल में रुकने की जगह दी। इसके बाद 13 भैंसों को चोरी कर उनके हवाले किया गया।
लेकिन भैंसों को लेकर जाते समय बागवानी में पुलिस दिखाई दी। पुलिस को देखते ही आरोपी भैंसों को छोड़कर भाग निकले।
दल्लो से पूछताछ में सामने आया एक और नाम
इसके बाद पुलिस ने 3 सितंबर को दल्लो उर्फ दलवीर गुर्जर को गिरफ्तार किया।
पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में दल्लो ने बताया कि भिडोली निवासी गिर्राज उर्फ हक्के उर्फ लोहे यादव ने उसे फोन करके भैंस चोरी के लिए बुलाया था।
बताया गया कि गिर्राज ने मोबाइल पर उसकी बात गंगाराम यादव से कराई। इसके बाद सभी बेहरदा के पास पहुंचे, जहां गंगाराम ने उन्हें अपने प्लॉट पर रुकने की जगह और खाना उपलब्ध कराया।
अगले दिन उन्हें चोरी की 13 भैंसें सौंपे जाने की बात सामने आई है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश
पुलिस ने इसी दिन गिर्राज उर्फ हक्के उर्फ लोहे यादव को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
अब पुलिस की जांच चोरी में शामिल अन्य आरोपियों और आरोपियों को पनाह या सहयोग देने वाले लोगों तक पहुंच गई है।
पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल बाकी आरोपियों की तलाश जारी है और उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
यानी 13 भैंस चोरी की इस वारदात में पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़कर नेटवर्क की कई कड़ियां जोड़ दी हैं, जबकि अब बाकी आरोपियों और मददगारों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।


