जय अंबे इमरजेंसी सर्विस को एक माह पहले नोटिस व मेल भेजने का दावा, 1 सितंबर से करीब 10 जिलों में अधिकांश वाहन बंद होने की जानकारी
शिवपुरी/ मध्य प्रदेश में गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए संचालित की जाने वाली 108 जननी एक्सप्रेस सेवा के कई जिलों में प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। वाहन संचालकों का आरोप है कि करीब 24 महीने से भुगतान लंबित होने के कारण आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसके चलते 1 सितंबर से प्रदेश के लगभग 10 जिलों में जननी एक्सप्रेस की अधिकांश गाड़ियां बंद हैं।
जानकारी के अनुसार, सेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के संबंध में जय अंबे इमरजेंसी सर्विस कंपनी को पहले भी अवगत कराया गया था। उनका दावा है कि करीब एक माह पूर्व कंपनी को इस संबंध में नोटिस एवं ई-मेल के माध्यम से भी सूचना दी गई थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होने पर वाहन संचालन प्रभावित हो गया।
बताया जा रहा है कि मंदसौर, नीमच, रतलाम, उज्जैन, मुरैना सहित लगभग 10 जिलों में 1 सितंबर से जननी एक्सप्रेस सेवा पर असर पड़ा है। दावा किया जा रहा है कि अधिकांश वाहन बंद हैं और केवल सीमित संख्या में, लगभग दो प्रतिशत गाड़ियां ही संचालित हो रही हैं। हालांकि जिलावार वाहनों की वास्तविक संख्या और सेवा की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग एवं कंपनी की ओर से किया जाना बाकी है।
जननी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा के प्रभावित होने से सबसे बड़ी चिंता गर्भवती महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को लेकर जताई जा रही है। यह सेवा विशेष रूप से प्रसव के दौरान महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य केंद्र एवं अस्पताल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में वाहनों के बंद होने से आपात स्थिति में मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सेवा से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से लंबित भुगतान के कारण वाहन मालिकों एवं संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वाहन की किस्त, चालक का वेतन, डीजल, रखरखाव और अन्य खर्चों का भार लगातार बढ़ने के कारण गाड़ियों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है।
वाहन संचालकों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर संबंधित कंपनी को समय रहते जानकारी दे दी थी, लेकिन उचित समाधान नहीं निकलने के कारण यह स्थिति निर्मित हुई। उन्होंने मांग की है कि लंबित भुगतान को जल्द से जल्द जारी किया जाए और जननी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण सेवा को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि जननी एक्सप्रेस सेवा बंद होने के कारण किसी गर्भवती महिला या जरूरतमंद मरीज को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और किसी प्रकार की जनहानि या गंभीर घटना सामने आती है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
सेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्होंने कंपनी को पहले ही स्थिति से अवगत करा दिया था। उनका आरोप है कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण कई जिलों में सेवा प्रभावित हुई है। उन्होंने इस पूरे मामले में जय अंबे इमरजेंसी सर्विस कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित कंपनी इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जननी एक्सप्रेस सेवा को दोबारा पूरी क्षमता के साथ शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। क्योंकि यह मामला केवल वाहनों के भुगतान का नहीं, बल्कि हजारों गर्भवती महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों की सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा हुआ है।
जननी एक्सप्रेस सेवा का प्रभावित होना एक गंभीर चेतावनी है। समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।


