शिवपुरी/करैरा। तहसील करैरा क्षेत्र के ग्राम खिरिया मझरा, खिरिया मार के ग्रामीणों ने शासकीय रास्ते पर कथित अवैध कब्जे को लेकर जिला कलेक्टर के समक्ष आवेदन देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते पर कब्जे के कारण करीब 25–30 परिवारों के 400 से 500 लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है और उनके पास आने-जाने के लिए दूसरा रास्ता उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार वे इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आवेदन दे चुके हैं, लेकिन आज दिनांक तक रास्ते से कथित कब्जा हटाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण फिर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्या से प्रशासन को अवगत कराया।
₹6 हजार किराया देकर पहुंचे कलेक्टर कार्यालय
आवेदन में ग्रामीणों ने अपनी परेशानी का जिक्र करते हुए कहा कि वे अपनी मजदूरी और खेती का काम छोड़कर किराये की लोडिंग गाड़ी से जिला मुख्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का दावा है कि इसके लिए उन्हें करीब 6 हजार रुपए किराया देना पड़ा। उनका कहना है कि बार-बार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने से गरीब मजदूरों और किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रोजमर्रा के काम से भी हाथ धोना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने आवेदन के साथ खसरा-खतौनी की छायाप्रति, सर्वे नंबर एवं पंचनामा सहित संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की बात कही है।
ग्रामीणों का आरोप—दबाव बनाकर रास्ते पर किया गया कब्जा
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिस रास्ते से वर्षों से ग्रामीणों का आवागमन होता रहा है, उस पर दबाव और धमकी के माध्यम से कब्जा कर लिया गया है। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों को स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, राजस्व रिकॉर्ड एवं मौके की स्थिति का सत्यापन कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
“आखिर कार्रवाई क्यों नहीं होती?”—ग्रामीणों का सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब रास्ता शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है और उसके संबंध में दस्तावेज भी प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं, तो फिर कथित कब्जा हटाने में इतनी देरी क्यों हो रही है? ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या कब्जाधारियों को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है? यदि नहीं, तो बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक-दो परिवारों की समस्या नहीं है, बल्कि सैकड़ों लोगों के आवागमन और रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है। रास्ता बंद होने से मजदूरों, किसानों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सात दिन का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात दिवस के भीतर मामले की जांच कर रास्ता खुलवाने तथा कथित अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं की गई तो वे मजबूर होकर उग्र आंदोलन एवं सड़क जाम करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि आंदोलन से पहले वे प्रशासन को पर्याप्त समय दे रहे हैं ताकि अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और विवाद का न्यायपूर्ण समाधान कराएं।
जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर करें निरीक्षण
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित राजस्व अधिकारियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजकर शासकीय रास्ते की वास्तविक स्थिति का सीमांकन और भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में रास्ते पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो नियमानुसार तत्काल कब्जा हटाकर ग्रामीणों का आवागमन बहाल किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते, बल्कि प्रशासन से कानूनी और न्यायपूर्ण समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि गरीब परिवारों को बार-बार जिला मुख्यालय बुलाने के बजाय प्रशासन को स्वयं मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान करना चाहिए।
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन इस मामले में मौके का निरीक्षण कर कार्रवाई करता है या फिर 400–500 लोगों की परेशानी इसी तरह बनी रहती है।



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