चार साल पहले ज्ञापन, पहली खबर के बाद भी नहीं जागा प्रशासन!

0



भौराना-चंदनपुरा सड़क आज भी कागजों में—बारिश में नाले, कीचड़ और गड्ढों से जूझ रहे किसान, आखिर कब बनेगी 7–8 किमी पक्की सड़क?


शिवपुरी/पोहरी।

ग्राम पंचायत गूगरीपुरा के ग्राम भौराना से चंदनपुरा तक पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों की परेशानी अब केवल सड़क की मांग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता पर बड़ा सवाल बनती जा रही है। करीब चार साल पहले ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर तत्कालीन राज्यमंत्री सुरेश राठखेड़ा को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।


ग्रामीणों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद भी अब तक मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई है। न सड़क निर्माण शुरू हुआ, न रास्ते की स्थायी मरम्मत हुई और न ही ग्रामीणों को कोई स्पष्ट जानकारी दी गई कि आखिर उनकी सड़क कब बनेगी।


चार साल से मांग, फिर भी जिम्मेदारों के पास जवाब नहीं


5 जुलाई 2021 को ग्रामीणों ने अपनी समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपा था। उस समय उम्मीद थी कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेकर सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि इतने वर्षों में एक सड़क की मांग पर कार्रवाई नहीं हो सकती तो ग्रामीण विकास के दावों की जमीनी हकीकत क्या है?


बारिश में सड़क नहीं, मुसीबत का रास्ता


भौराना से किसानों के खेत करीब 5–6 किलोमीटर दूर हैं। खेतों तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्ते पर जगह-जगह गड्ढे हैं और रास्ते में 2–3 नाले भी पड़ते हैं। बारिश के दिनों में नालों में पानी और रास्ते में कीचड़ भर जाने से आवागमन बेहद कठिन हो जाता है।


किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी तब खड़ी होती है जब खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि उपकरण और फसल से संबंधित सामग्री खेतों तक पहुंचानी होती है। खराब रास्ते के कारण कई बार वाहन खेतों तक नहीं पहुंच पाते और किसानों को अतिरिक्त परेशानी और खर्च उठाना पड़ता है।


सिर्फ भौराना नहीं, कई गांवों का जुड़ाव होगा आसान


ग्रामीणों के मुताबिक भौराना से चंदनपुरा तक करीब 7–8 किलोमीटर पक्की सड़क बन जाए तो इसका लाभ केवल एक गांव को नहीं, बल्कि आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा। गुगरीपुरा, मढ़ेरी, बिनैगा, नौहरी सहित आसपास के गांवों के लोगों का आवागमन भी आसान हो सकता है।


सड़क बनने से किसानों को खेतों तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी, कृषि सामग्री का परिवहन आसान होगा और बारिश के दौरान आवागमन की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।


पहली खबर के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, अब जिम्मेदारों पर सवाल


ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या को लेकर पहले ज्ञापन दिया गया, फिर लगातार मांग उठाई गई और अब समाचार के माध्यम से भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा चुका है। इसके बावजूद यदि मौके पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ग्रामीणों की समस्या का समाधान कब होगा?


ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करें, सड़क निर्माण की व्यवहारिकता और प्रस्ताव की स्थिति स्पष्ट करें तथा यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया लंबित है तो उसे तत्काल आगे बढ़ाया जाए।


अब आश्वासन नहीं, मौके पर काम दिखाई दे—ग्रामीणों की मांग


ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें वर्षों से आश्वासन और इंतजार के अलावा कुछ नहीं मिला। बारिश का मौसम आते ही उनकी परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में अब वे केवल यह सुनना नहीं चाहते कि सड़क निर्माण की मांग पर विचार किया जा रहा है, बल्कि चाहते हैं कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया जमीन पर दिखाई दे।


ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस मामले को प्राथमिकता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कराकर सड़क निर्माण की कार्रवाई शुरू की जाए।


चार साल पहले दिया गया ज्ञापन आज भी प्रशासन के सामने एक सवाल बनकर खड़ा है—आखिर भौराना से चंदनपुरा तक सड़क के लिए ग्रामीणों को और कितने साल इंतजार करना पड़ेगा?

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)
/*-- Don't show description on the item page --*/
To Top