इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम चक्क के समस्त ग्रामीणों ने आज दिनांक 08.09.2026 को श्रीमान जिलाधीश महोदय, जिला शिवपुरी को एक बार फिर आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।
*खुले चौपाल पर, बारिश में भीगते हुए पढ़ते हैं बच्चे*
ग्रामीणों ने आवेदन में बताया कि ग्राम चक्क, ग्राम पंचायत दौरानी, जनपद पंचायत पोहरी में एक भी शासकीय विद्यालय भवन नहीं है। जिसके कारण गांव के गरीब आदिवासी बच्चों का पढ़ना बहुत मुश्किल हो रहा है। गांव में पंचायत का एक चौपाल है, जिसकी दीवारें भी नहीं हैं। उसी टूटे-फूटे चौपाल पर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
वर्तमान में वर्षात का समय चल रहा है, ऐसे में खुले में पढ़ रहे बच्चों और शिक्षकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश आते ही बच्चों को इधर-उधर भागना पड़ता है, किताबें भीग जाती हैं। सर्दी और गर्मी में भी यही हाल रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में इस चौपाल के अलावा कोई अन्य शासकीय भवन, आंगनवाड़ी केंद्र या कोई अन्य सुरक्षित जगह भी नहीं है, जहां बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जा सके। इसलिए बच्चों को पढ़ने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
*सरपंच से लेकर DEO तक को बता चुके, कोई सुनवाई नहीं*
यह समस्या आज की नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में मौखिक रूप से ग्राम के सरपंच के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी को भी कई बार अवगत कराया गया है। पूर्व में सरपंच ग्राम पंचायत दौरानी द्वारा लिखित में भी जिलाधीश महोदय को आवेदन दिया गया था, साथ में खुले में पढ़ रहे बच्चों की फोटो भी दी गई थी। लेकिन आज दिनांक तक न तो शाला भवन बना और न ही किसी अधिकारी ने सुध ली।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई सालों से वे इस समस्या से जूझ रहे हैं, कई बार आवेदन दे चुके हैं, पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। न तो कोई जनप्रतिनिधि सुनता है और न ही कोई अधिकारी सुनता है। आदिवासी गरीब बच्चे होने के कारण उनकी आवाज को अनसुना कर दिया जाता है।
*ग्रामीण बेबस, हाथ जोड़कर कलेक्टर से गुहार*
आखिर में बेबस होकर समस्त प्रार्थीगण ग्राम चक्क ने श्रीमान जिलाधीश महोदय से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द निराकरण किया जाए। गांव में शासकीय विद्यालय भवन बनवाने हेतु संबंधित विभाग को आदेश प्रदान किए जाएं, ताकि भविष्य में बच्चों को इस तरह परेशान न होना पड़े और उनका भविष्य अंधकार में न जाए।
ग्रामीणों ने अपने आवेदन के साथ पूर्व में दिए गए आवेदन पत्र और खुले में पढ़ रहे बच्चों की फोटो की छायाप्रति भी संलग्न की है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन गरीब आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए क्या कदम उठाता है, या फिर यह आवेदन भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



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