कलश यात्रा के साथ भागवत कथा की शुरुआत कथावाचक शास्त्री ने कथा का महत्व बताया

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शिवपुरी  में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुक्रवार को कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। चौराहे वाले हनुमान मंदिर  परिसर से भगवताचार्य रामेश्वर दास महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से पूजा अर्चना कराकर कलशयात्रा को रवाना किया। बैंडबाजों और डीजे के साथ कलशयात्रा शिवपुरी के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई कार्यक्रम स्थल श्री गोरखनाथ मंदिर  पर पहुंची। जहां श्रीमद् भागवत की पूजा अर्चना की और पूजन के बाद कलश की स्थापना की गई।


कथा व्यास ने अपने प्रवचनों में उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत पुराण की जानकारी देते हुए कहा कि कथा का श्रवण करने से मानव जीवन में एक जन्म नहीं अपितु हमारे कई जन्मों के पापों का नाश होने के साथ ही हमारे शुभ कर्मों का उदय होता है। कथा सुनने मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि नारद जी ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद् भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। कथा व्यास ने कहा कि भगवत श्रवण से जीव के सभी पाप कर्म मिट जाते हैं। अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान सैकड़ों लोग मौजूद रहे।


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