मेले में धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्साह और उल्लास का माहौल भी देखने को मिला। परिसर में पूजन सामग्री, खिलौने, खाद्य पदार्थों और अन्य दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी मेले का आनंद लेते नजर आए। सिंध नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल दिनभर बनी रही।
हालांकि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच यातायात व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित नजर आई इतना ही नहीं नगर परिषद की व्यवस्था की कमी रही जबकि हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं ना तो उन्हें शौचालय ना ही महिला सिर्फ दलों के लिए कपड़ा बदलने की व्यवस्था और ना ही साफ सफाई।
सनकुआं धाम की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। आश्चर्य की बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद मौके पर यातायात नियंत्रण के लिए पर्याप्त पुलिस बल अथवा ट्रैफिक कर्मी दिखाई नहीं दिए।
स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा पूर्व से ही यातायात प्रबंधन के उचित इंतजाम किए जाते तो लोगों को इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। कई स्थानों पर जाम जैसी स्थिति बनने से वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग से मांग की है कि धार्मिक आयोजनों और मेलों में भीड़ को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल और ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।


