अवैध वसूली से त्रस्त, ड्राइवर ने लगाया फांसी का फंदा

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 शिवपुरी–दिनारा-सिकंदरा चेक पोस्ट के पास एक दर्दनाक दृश्य देखने को मिला, जहां एक ट्रक ड्राइवर ने अवैध वसूली से दुखी होकर पेड़ से रस्सी बांधकर खुद को फांसी लगाने का प्रयास किया। घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, 

पीड़ित ड्राइवर अपनी लाल रंग की गाड़ी के ऊपर खड़ा है और उसके गले में रस्सी का फंदा बंधा हुआ है। वह लगातार चिल्ला रहा है कि पुलिस प्रशासन और आरटीओ मिलकर उससे अवैध वसूली कर रहे हैं। उसके मुताबिक, सिकंदरा बैरियर पर पुलिस वाले बिना किसी कारण के गाड़ियों को रोकते हैं और चालकों से कागजात छीन लेते हैं। फिर उन्हें धमकी दी जाती है कि या तो वे 'एंट्री' जमा करो, नहीं दिए तो ऑनलाइन चालान कर दिया जाएगा।

ड्राइवर ने बताया कि उसके पास गाड़ी के सभी कागजात सही और पूरे थे, लेकिन फिर भी उससे अवैध वसूली की मांग की गई। उसने आरोप लगाया कि अगर कोई ड्राइवर पैसे नहीं देता, तो उसकी गाड़ी को आगे जाने दिया जाता है और बाद में ऑनलाइन चालान काट दिया। इस वीडियो में ड्राइवर का दर्द साफ झलकता है, जब वह कहता है, "गाड़ी वाला मरे तो मरने दो, इनको एंट्री दो तो चलानी है, नहीं दे तो चालान ऑनलाइन।" वह यह भी बताता है कि वह झारखंड का रहने वाला है और कोलकत्ता से आ रहा है।

पुलिस और आरटीओ की मिलीभगत का आरोप

इस घटना के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि ड्राइवर उनसे मदद की गुहार लगा रहा है, लेकिन वे उसे नीचे उतरने के लिए कहते हैं और समझाने की कोशिश करते हैं कि वह पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराए। इस पर ड्राइवर ने साफ शब्दों में कहा, "थाने में मुझे उल्टा डांटेंगे।" यह बताता है कि ड्राइवरों को पुलिस प्रशासन पर कितना कम भरोसा रह गया है।

वायरल हो रहे वीडियो में एक शख्स खुद को थाना प्रभारी से जुड़ा हुआ या या थाना प्रभारी ही बता रहा है और ड्राइवर को आश्वस्त कर रहा है कि वह उसकी मदद करेगा। लेकिन ड्राइवर उसकी बातों पर भरोसा नहीं करता और लगातार अवैध वसूली का विरोध कर रहा है।

 प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है? एक तरफ सरकार प्रदेश को एक विकसित राज्य बनाने का दावा कर रहे है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे भ्रष्ट अधिकारी खुलेआम गुंडागर्दी कर रहे हैं। इस तरह की अवैध वसूली से परेशान होकर अगर एक आम आदमी आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर हो जाए, तो यह हमारे समाज और प्रशासन के लिए एक शर्मनाक स्थिति है। यह केवल एक ड्राइवर की समस्या नहीं है, बल्कि देश के उन लाखों ड्राइवरों की है जो रोज इसी तरह के उत्पीड़न का शिकार होते हैं। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीद है।

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